हरियाणा में पूर्ण बहुमत की पहली भाजपा सरकार के चार साल पूरा हो गए हैं। बेशक, टीम मनोहर सुशासन की राह पर आगे बढ़ रही है, लेकिन चुनौतियां भी अपार हैं। 26 अक्तूबर 2014 को पंचकूला में शपथ ग्रहण के बाद सरकार ने व्यवस्था परिवर्तन के संकल्प के साथ काम करना शुरू किया था। चार साल के कार्यकाल में सरकार के दामन पर तीन बड़े दाग भी लगे हैं। रामपाल आश्रम प्रकरण, जाट आरक्षण आंदोलन, पंचकूला हिंसा में लगभग सौ लोगों की जान गई, हरियाणा धूं-धूं जला। सरकार ने हालात संभालकर नए सिरे से प्रदेश को पटरी पर लाया और अनेक क्षेत्रों में नंबर बन बनाया है।
डिजिटल हरियाणा से भ्रष्टाचार खत्म करने की दिशा में काफी सफलता भी मिली है। ऑनलाइन ट्रांसफर योजना ने शिक्षा निदेशालय में पांव जमा चुके तबादला माफिया को उखाड़ फेंका है। अब सरकार चुनावी साल में प्रवेश कर चुकी है, इसलिए उसे रामपाल के करौंथा आश्रम की हिंसा, जाट आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और पंचकूला हिंसा के दौरान हुई मौतों के दाग धोने होंगे। साथ ही प्रदेश की 36 बिरादरी का भी विश्वास जीतना होगा। जनता का विश्वास जीतकर ही मनोहर लाल सरकार दोबारा सत्ता पर काबिज हो सकती है। चार साल में हुए कामों को सरकार को जनता तक भी पहुंचाना होगा।
बेलगाम अफसरशाही के कारण अनेक योजनाएं धरातल तक नहीं पहुंच पा रही। सरकार को उस दिशा में भी काम करने की जरूरत है। कहीं न कहीं भाजपा कार्यकर्ता भी तेजी से काम न हो पाने के कारण निराश रहे हैं। सरकार को उनके भी गिले-शिकवे दूर करने पड़ेंगे। जिलों में अफसरशाही के भाजपा कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने का मामला कई बार बैठकों में भी उठ चुका है। इसलिए टीम मनोहर को चुनावी दंगल में कूदने से पहले कार्यकर्ताओं को जहां खुश करना होगा, वहीं उनमें नई आस भी जगानी होगी। चूंकि, कार्यकर्ता भी जीत की धुरी रहेंगे।
कांग्रेस-इनेलो से दो कदम आगे निकलकर बिछानी होगी बिसात
सीएम खट्टर
भाजपा को चुनावी साल में विपक्ष से भी पार पाना होगा। चूंकि, सत्ता से दूर चल रहे कांग्रेस और इनेलो जीत दर्ज करने के लिए कड़ा चक्रव्यूह रचेंगे। इसलिए भाजपा को उससे दो कदम आगे निकलते हुए चुनावी बिसात बिछानी होगी। कांग्रेस और इनेलो चुनाव के मद्देनजर अभी से प्रदेश सरकार पर हमलावर हैं।
सरकार को किसानों, कर्मचारियों, अपराध, विकास, एसवाईएल निर्माण व घोटालों सहित अनेक मुद्दों पर घेरने में जुट गए हैं। सरकार को नकारात्मक प्रचार से पार पाकर जनहित में किए गए कामों को लोगों तक पहुंचाना होगा। तभी भाजपा की सत्ता वापसी की राह सुगम होगी। महिलाओं-दलितों के खिलाफ अपराध पर भी काबू पाना होगा। दुष्कर्म के मामलों पर ब्रेक लगने पर ही बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का सपना पूरी तरह साकार हो पाएगा।