हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर
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4 साल में हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार न किसानों को संभाल पाई और न ही कर्मचारियों को। सीएम फिर भी दावा करते हैं कि उन्होंने बहुत अच्छा काम किया है। सरकार का पांचवा वर्ष शुरू हो गया है। लेकिन हैरत की बात यह है कि अभी तक सरकार और कर्मचारियों का टकराव जारी है। कर्मचारियों के साथ-साथ किसान संगठन भी अपनी मांगों को लेकर मुखर है। चूंकि सरकार के लिए ये चुनाव वर्ष है, इसलिए जरूरी होगा कि इस टकराव को जल्द खत्म किया जाए, वरना चुनावी साल में कर्मचारियों और किसानों का संर्घष भारी पड़ सकता है।
चार साल पूरे होने पर जहां मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कर्मचारियों को भी साधने की कोशिश की, वहीं हड़ताली कर्मचारियों की ‘जिद’ पर अपना रूख भी साफ कर दिया। जिसके बाद इस टकराव के जल्द खत्म होने की संभावनाएं कम होती दिख रही है। लेकिन सरकार को जल्द इस टकराव को खत्म कर कर्मचारियों और किसानों को अपने पाले में लेना होगा। इस वक्त देखा जाए तो सरकार के साथ सबसे बड़ा टकराव रोडवेज कर्मचारियों का चल रहा है। 16 अक्टूबर से शुरू हुई चक्काजाम हड़ताल 29 अक्टूबर तक घोषित कर दी गई है। पहली बार प्रदेश में इतने दिनों तक सरकारी बसों का पहिया थमा है।
इतना ही नहीं अब रोडवेज कर्मचारियों के संघर्ष में अन्य विभागों के कर्मचारी भी कूद चुके हैं। जोकि सरकार के लिए चिंता का विषय है। इस संघर्ष पर सीएम मनोहर लाल ने कहा कि उनकी सरकारी ने सरकारी कर्मचारियों के हित में जितने फैसले लिए हैं, उतने आज तक की सरकारों ने नहीं लिए। सरकारी कर्मचारियों को 1 जनवरी 2016 से सातवें वेतनमान का लाभ दिया जा चुका है। जबकि कई राज्यों ने आजतक ये लाभ नहीं दिया। सीएम ने कहा कि कर्मचारी यूनियनों का काम होता है कि वे कर्मचारियों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाएं और उसके समाधान के लिए संघर्ष करें। लेकिन रोडवेज कर्मियों की हड़ताल महज जिद की हड़ताल है।
रोडवेज कर्मियों की यूनियनें कर्मचारियों की समस्याओं पर फोकस करने की बजाए सरकारी नीतियों में दखलांदाजी कर रही है। जोकि अनुचित है। सरकार निजी बसों को जनता के लिए हायर कर रही है। रोडवेज कर्मियों के अलावा शिक्षा विभाग, बिजली विभाग परिवहन विभाग, वन विभाग, स्वास्थ्य विभाग समेत अन्य विभागों के कर्मचारी भी निरंतर धरना, प्रदर्शनों, रोष रैलियों का सिलसिला जारी रखे हुए हैं। कर्मचारियों के साथ-साथ स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें को सही ढंग से लागू करवाने को लेकर प्रदेश में किसानों की लंबी हड़तालें भी हुई और अब फिर किसान लामबंदी कर आंदोलन केअगले चरण की तैयारी में हैं। ऐसे में ये भी सरकार के लिए चुनौती होगा कि इस चुनावी वर्ष में किसान और कर्मचारियों का असंतोष खत्म कैसे करना है।