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नाबालिग के अपहरणकर्ता को चार साल कैद

Tue, 26 Aug 2014 12:58 AM IST
ब्यूरा/अमर उजाला/ जगाधरी।
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जगाधरी। शादी का झांसा देकर नाबालिग का अपहरण करने के दोषी को कोर्ट ने चार साल कैद तथा 12 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर दो महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। यह फैसला फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश रितु गर्ग ने सुनाया है। कोर्ट में करीब डेढ़ साल तक चली सुनवाई के दौरान 13 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत कोर्ट ने सोमवार को अपना फैसला सुना दिया।
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कोर्ट में करीब एक साल तक चली सुनवाई के दौरान 13 लोगों के गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत कोर्ट ने चंद्रपाल को नाबालिग लड़की के अपहरण का दोषी करार देते हुए भादंसं की धारा 363 में चार साल कैद तथा पांच हजार रुपये जुर्माना, भादंसं की धारा 366 ए में दोषी करार देते हुए चार साल कैद और पांच हजार रुपये जुर्माना किया है।

जबकि पोक्सो एक्ट के तहत दो साल कैद तथा दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर दो महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। उपरोक्त सभी सजाएं एक साथ चलेगी। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान दोषी को नाबालिग से दुराचार को दोषी नहीं पाया, इसलिए इसे केस से हटा दिया गया।
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क्या है मामला
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 23 जनवरी 2013 को खिजराबाद थाने में तैनात एएसआई राकेश कुमार पुलिस बल के साथ खिजराबाद मोड़ पर गश्त कर रहा था। इस दौरान खिजराबाद थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गांव के एक व्यक्ति ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि उसके पास एक लड़का तथा दो लड़कियां है। बड़ी बेटी की उम्र 17 साल है, जो कि करीब दो महीने पहले अपने मामा के घर बाकरवाला गई थी। जो कि कल रात 12 से 4 बजे के बीच उठकर कहीं चली गई।

जांच के दौरान उन्हें पता चला कि देवधर गांव निवासी चंद्रपाल उसकी बेटी को बहला फुसलाकर शादी का झांसा देकर अगवा करके ले गया है। पुलिस ने पीड़िता के पिता की शिकायत पर चंद्रपाल के खिलाफ भादंसं की धारा 363 व 366 ए के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी।

पुलिस को आठ फरवरी 2013 को हाई कोर्ट चंडीगढ़ से चंद्रपाल व पीड़िता की बेटी की शादी होने बारे प्रोटेक्शन देने का आदेश थाना खिजराबाद को प्राप्त हुआ। 9 फरवरी को पुलिस ने सेफ हाउस तेजली जाकर पता किया, लेकिन लड़का-लड़की वहां नहीं मिलें। 17 फरवरी को शिकायतकर्ता ने हाई कोर्ट का आदेश पेश किया, जिसमें पुलिस को इस मामले में उचित कार्रवाई के आदेश दिए गए।

पुलिस जांच के दौरान पीड़िता नाबालिग पाई गई। पुलिस ने सात मार्च 2013 को चंद्रपाल के कब्जे से पीड़िता को बरामद कर लिया। पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल जांच के उपरांत इस मामले में दुराचार की धारा 376 को जोड़ दिया। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया। इसके बाद मामले की सुनवाई कोर्ट में शुरू हो गई।
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