जिला अदालत ने तीन साल पुराने धोखाधड़ी के मामले में शुक्रवार को अहम फैसला सुनाया। इस दौरान चार लोगों को दोषी ठहराते हुए पांच-पांच साल की सजा सुनाई गई। जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में दोषियों को छह महीने और जेल में बिताने पड़ेंगे। जबकि दो लोगों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
अदालत ने मनोज बावरा, विजय कुमार, सागर नेगी एवं अशोक कुमार को सजा सुनाई। जबकि इसी केस में रोहित गोयल तथा दिनेश कुमार को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। 18 अगस्त 2010 को पुलिस स्टेशन फेज-1 में शिकायतकर्ता पंकज खन्ना के बयानों के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।
इन लोगों पर आरोप था कि उन्होंने अन्य व्यक्तियों की मिलीभगत से कंपनी के ईपीओएम सॉफ्टवेयर के साथ छेड़छाड़ की। साथ ही राज्य के विभिन्न जिलों के डिस्ट्रीब्यूटरों को कंपनी द्वारा दिए गए आर्डर से अधिक सामान वेयरहाउस से बाहर भेजा। 3.32 करोड रुपये की धोखाधड़ी की।
पता चला चला था कि भेजे जाने वाले सामान की बिलिंग मनोज करता था। जबकि माल की चेकिंग तथा पैकिंग का काम सागर नेगी एवं अशोक कुमार करते थे। जबकि विजय कुमार इनके काम में मदद करता था। यह भेजे गये माल के सही बिल को कैंसिल करके अधिक माल का नया बिल बनाकर कंपनी को चूना लगाते थे।