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Chandigarh News: ट्राइसिटी के इकलौते घूमने वाले मंच पर क्रमवार दी जाती है चार दृश्यों की प्रस्तुति

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चंडीगढ़। ऑर्डिनेंस फैक्टरी सांस्कृतिक मंच सेक्टर-29 पिछले 56 साल से प्रभु श्री राम की लीला का मंचन करता आ रहा है। इसकी खासियत यह है कि यहां पर घूमने वाला मंच है, और इसमें एक के बाद दूसरे दृश्य का ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता, वह दृश्य घूमने वाले मंच की वजह से पहले से ही तैयार रहता है। जैसे ही एक दृश्य का मंचन खत्म होता है तो मंच को घुमाकर पीछे से तैयार दूसरा दृश्य पेश कर दिया जाता है। क्योंकि यहां पर घूमने वाले मंच की वजह से क्रमवार चार सेटअप दृश्य तैयार रहते हैं और कलाकार जल्द प्रस्तुति दे पाते हैं।
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इस साल भी इस मंच पर पूरी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ रामलीला का मंचन किया जा रहा है। इसके मद्देनजर सोमवार को इस मंच से अनसुईया उपदेश, शूर्पनखा, खर-दूषण वध, सीता हरण और जटायु वध का मंचन किया गया। बड़ी संख्या में उपस्थित दर्शकों ने रामलीला मंचन का आनंद लिया। आकाश मार्ग से शूर्पनखा और जटायु का आना आकर्षण का विशेष केंद्र रहा। इसके बाद विशेष तकनीक से जटायु संस्कार ने दर्शकों की वाहवाही लूटी।
सीता की भूमिका में मीनाक्षी भट्ट के दमदार संवाद
माता सीता ने जब लंकापति रावण को कहा कि दुष्ट खड़ा रह, खबरदार स्वामी अब आने वाले हैं, जो धनुष तोड़कर लाए थे वो ही मेरे रखवाले हैं, अब तक तो मैं इस रेखा में थी, अब सतधर्म की रेखा में हूं, अबला हूं पर इतना बल है कि पतिव्रता की रेखा में हूं, तू क्या संसार अगर आए तो भी बल तोल नहीं सकता, सतवंती के सत के आगे ब्रह्मा भी बोल नहीं सकता। यह दमदार संवाद सीता की भूमिका में मीनाक्षी भट्ट ने बोले तो दर्शक भावविभोर हो उठे और उन्होंने जोरदार तालियां बजाई और जय श्रीराम के जयकारे लगाए। नवदीप ने माता अनसुईया, रवि कपूर ने अत्रि ऋषि, गणेश मिश्रा ने अगस्त्य ऋषि, अशोक ने शूर्पनखा, अरुण ने खर, मन्नी ने दूषण, अनीश ने मारीच, मनोज शर्मा ने रावण, मीनाक्षी भट्ट ने माता सीता, करण राणा ने श्री राम, राहुल ने लक्ष्मण एवं रवि यादव ने जटायु की भूमिका में अपने किरदारों को जीवंत कर दिया।
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घूमने वाला है ओसीएफ सांस्कृतिक मंच का स्टेज
ओसीएफ सांस्कृतिक मंच के निर्देशक ज्योति स्वरूप भारद्वाज ने बताया कि सांस्कृतिक मंच भारत वर्ष का इकलौता ऐसा मंच है जो घूमता है। उन्होंने कहा कि इस मंच से एक के बाद एक चार दृश्य बिना रुके दर्शकों के सामने प्रस्तुत किए जाते हैं। जिसका दर्शक पूरी तन्मयता और श्रद्धा के साथ आनंद लेते हैं। इतने वर्षों में भी इस मंच की लोकप्रियता में कमी नहीं आई। वर्ष 1982 में बने इस मंच पर श्री रामलीला मंचन को देखने दर्शक बहुत दूर दूर से आते हैं। विशेष तकनीक, लाइट्स के प्रभाव से प्रत्येक दृश्य अपने आप में एक अलग छाप छोड़ता है।

शुरू में लोहे के ड्रम पर लकड़ी के फट्टे रखकर बनता था घूमने वाला मंच
शुरूआत में यहां पर रामलीला का घूमने वाला मंच लोहे के ड्रमों पर लकड़ी के फट्टे लगाकर तैयार किया जाता था। जब से घूमने वाला मंच बना तब से अब तक हर वर्ष इस मंच पर तकनीक और अदाकारी का अनूठा संगम दर्शकों को देखने को मिलता आ रहा है। पुराने समय से जब लाइट्स इतनी डिमांड में नहीं थी, तब रोशनी वाले बल्बों की मदद से मंचन होता। समय के साथ-साथ तकनीक में विकास होने के साथ इस मंच ने भी नए प्रयास किया। आज यह मंच ट्राइसिटी का सबसे प्रसिद्ध और तकनीकी रूप से विकसित मंच है। पहले जहां दर्शक भूमि पर बैठकर मंचन का आनंद लेते थे। अब दर्शकों के लिए भी सुविधाएं बढ़ गई हैं। दर्शकों के लिए लगभग 1500 कुर्सियां लगाई जाती हैं। दर्शकों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था, गाड़ियों की पार्किंग से लेकर दर्शकों के आने और जाने के मार्ग को बड़े सुनियोजित ढंग से नियंत्रित किया जाता है। जिसमे चंडीगढ़ पुलिस के साथ साथ मंच के स्वयंसेवक अपना पूरा योगदान देते हैं।
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