सड़क हादसे की सूचना जैसे जैसे लुधियाना के हैबोवाल इलाके में पहुंची वैसे ही कोहराम मच गया। इलाके में सबको प्यार से बुलाने वाले प्रिंटिंग कारोबारी दीपक बांसल उर्फ लक्की की मौत की खबर सुनते ही सब दंग रह गए। दीपक के साथ गए कर्मचारियों की मौत की खबर ने भी सभी को स्तब्ध कर दिया।
इलाके के लोग दीपक के घर पहुंचने लगे तो पता चला कि दीपक की मां अपने बेटे की मौत से बेखबर है, इस कारण लोग घर की तरफ गए ही नहीं। घर से थोड़ी दूर लोग खड़े बातें करते रहे। दीपक के साथ उसकी स्विफ्ट कार में सवार अंशुल, अरविंद और संजय की मौत की खबर भी उनके परिजनों को शुक्रवार सुबह मिली। परिजनों ने उनसे संपर्क कर पता करने की कोशिश की तो पता चला कि सभी कार सवारों की मौत हो गई है। जिसके बाद तीनों के परिजन भी अंबाला के लिए रवाना हो गए।
दीपक के घर मां के अलावा कोई नहीं था। मां को दीपक की मौत के बारे में पता नहीं था, जिस कारण बाहर खड़े लोगों ने उनसे बात करने से मना कर दिया। इलाके के लोगों ने बताया कि दीपक के पिता तिलकराज की करीब पांच साल पहले मौत हो गई थी। उसका बड़ा भाई संदीप है, वह भी बीमार रहता है। जिस कारण वह कामकाज नहीं कर पाता। पिता की मौत के बाद घर की सारी जिम्मेदारी दीपक पर ही थी। जिसे वह बखूबी निभा रहा था।
लोगों के अनुसार दीपक स्वभाव का काफी अच्छा था। उसमें मालिकों वाला कोई रौब नहीं था। वह फैक्ट्री में काम करने वाले तीनों मुलाजिमों को अपने छोटे भाइयों की तरह ही रखता था। उसके मौसा सुदर्शन बांसल काम में पार्टनर हैं। कुछ समय पहले उसे देहरादून से टी शर्ट का कोई बड़ा आर्डर मिला था।
उसी काम के सिलसिले में वह रात को देहरादून निकल गया। जाते हुए वह अपने साथ तीनों मुलाजिमों को भी ले गया, ताकि कामकाज समझने में कुछ और फायदा होगा। मगर भगवान को कुछ और ही मंजूर था। दीपक के घर जहां अंधेरा छा गया।