पढ़ने वालों की रुचि का अंदाजा लाइब्रेरी और वहां किताबों के भंडार से लगाया जा सकता है। चंडीगढ़ में चार बड़ी लाइब्रेरियां हैं। इनमें दो सरकारी और दो एनजीओ की ओर से चलाए जा रही हैं। इनमें करीब 2 लाख सदस्य हैं। इन लाइब्रेरियों में जनरल रीडर के अलावा वृद्धों और बच्चों के लिए अलग से सेक्शन बनाए गए हैं।
विज्ञापन
किताबें पढ़ने वालों के लिए चंडीगढ़ में जगह और संसाधन दोनों उपलब्ध हैं। वहीं इसके लिए आपकी जेबखर्ची भी ना के बराबर लगेगी। शहर में दो सरकारी लाइब्रेरियां सेक्टर-17 में टीएन स्टेट लाइब्रेरी और सेक्टर-34 में साउथ डिविजनल स्टेट लाइब्रेरी है। इनमें 3 से 14 साल तक बच्चों के लिए अलग सेक्शन है। उनके लिए कार्ड अलग बनता है।
14 साल के बाद उनका कार्ड अपडेट किया जाता है। 14 साल से लेकर वृद्ध लोगों के लिए लाइफ टाइम मेंबरशिप कार्ड बनता है। इसमें आप लाइब्रेरी की किताबों के अलावा मैगजीन, रीडिंग रूम, न्यूजपेपर सेक्शन, कंप्यूटर, विभिन्न विषयों पर रेफरेंस किताबें और रिसर्च का लाभ ले सकते हैं।
विज्ञापन
इसके अलावा शहर में दो अच्छी एनजीओ की ओर से संचालित लाइब्रेरियां भी हैं। इनमें सेक्टर 15 स्थित लाला लाजपत राय भवन स्थित द्वारकादास लाइब्रेरी और सेक्टर 16 स्थित गांधी स्मारक भवन स्थित लाइब्रेरी शामिल हैं। यहां आपको आजादी के समय की और शहीदों से संबंधित दुर्लभ किताबें पढ़ने को मिलेंगी।
सदस्य बनने के लिए ये कागजात जरूरी
चारों लाइब्रेरियों का सदस्य बनने के लिए आपको ट्राइसिटी के निवास का प्रमाण पत्र दिखाना होगा। इसके लिए आधार कार्ड की फोटोकॉपी और ओरिजनल कार्ड लाइब्रेरी में दिखाना है। आधार कार्ड की फोटोकॉपी के साथ एप्लीकेशन फॉर्म पूछी गई जानकारी के साथ भरकर सेल्फ एटेस्ट कर जमा करना है। फॉर्म में दो पासपोर्ट साइज फोटो लगेंगी। इसके अलावा एक कार्ड पर दो किताबें 14 दिन के लिए इश्यू होगी। इसके बाद आपको रिइश्यू करवानी पड़ेगी। अन्यथा एक किताब पर हर दिन एक रुपये फाइन लगेगा।
यहां पढ़ने को मिलेंगी हर तरह की किताबें और अखबार
सेक्टर-17 और सेक्टर-34 स्थित लाइब्रेरी में साढे़ तीन लाख से ज्यादा नामी लेखकों, हिंदी, पंजाबी, उर्दू व अंग्रेजी भाषा में साहित्य, समाज-शास्त्र, विज्ञान, गणित, अर्थशास्त्र, भूगोल, इतिहास, उपन्यास, कविता-शास्त्र, लोक-प्रशासन, राजनीति-शास्त्र, रिसर्च स्टडीज, कंपीटीशन किताबें और विभिन्न विषयों पर रेफरेंस किताबें शामिल हैं।
इसके अलावा बच्चों के लिए अलग से सेक्शन बना है। जहां कहानियों, कविताओं और खेल, पहेलियों इत्यादि से संबंधित किताबों का भंडार हैं। न्यूजपेपर सेक्शन अलग से बनाया है। जहां रोजाना हिंदी, पंजाबी, अंग्रेजी और उर्दू भाषा के 35 अखबार आते हैं। यह दोनों पुस्तकालय यूटी शिक्षा विभाग की ओर से चलाए जाते हैं। दोनों लाइब्रेरी में करीब डेढ़ लाख मेंबर हैं।
गांधी के बारे में पढ़ना हो तो यहां आएं
अगर आप महात्मा गांधी के बारे में पढ़ना चाहते हैं या रिसर्च कर रहे हैं तो गांधी स्मारक भवन पुस्तकालय उपयुक्त जगह है। यहां आपको एक ही जगह पर गांधी के ऊपर, उनके द्वारा लिखी गईं और उन पर लिखीं लगभग 1800 पुस्तकें उपलब्ध हैं। इनमें कुछ दुर्लभ किताबें भी हैं। इनमें कलेक्टिव वर्क्स ऑफ महात्मा गांधी के 100 वॉल्यूम भी सम्मिलित हैं।
इसके अलावा यहां कई विभूतियों जैसे विनोबा भावे (विनोबा साहित्य के 21 वॉल्यूम), भगत सिंह, विवेकानंद, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, रवीन्द्रनाथ टैगोर आदि पर साहित्य उपलब्ध है। यहां लगभग तीन हजार के करीब किताबें और मैगजीन उपलब्ध हैं। वहीं विभिन्न भाषाओं के रोजाना 18 अखबार आते हैं।
यहां मिलेगी भगत सिंह व लाला लाजपत की दुर्लभ किताबें
सेक्टर-15 स्थित द्वारकादास लाइब्रेरी में भगत सिंह और लाला लाजपत राय की ओर से पढ़ी गईं और उनके द्वारा लिखी किताबें और अखबार के कॉलम, उनके ऊपर लिखी गई दुर्लभ किताबों का भंडार हैं। ये अब हेरिटेज का हिस्सा हैं। ये किताबें यहां अभिलेखागार विभाग में संरक्षित हैं।
वर्तमान में लाइब्रेरी में विभिन्न विषयों की अंग्रेजी, हिंदी, पंजाबी और उर्दू में लिखी गईं 90 हजार के करीब किताबें हैं। जब यह लाइब्रेरी लाहौर में थी तो भगत सिंह ने कुछ समय के लिए यहां नौकरी भी की थी। वे यहां किताबें मैनेज करने का काम करते थे। इसी लाइब्रेरी में भगत सिंह ने फ्रांस की राज्यक्रांति पर रिसर्च की थी। यहां भगत सिंह और उनके साथियों की जेल प्रोसिडिंग्स की फोटोकॉपी भी रखी गई है।
लाइब्रेरी मेंबरशिप चार्ज रुपये में
टीएस सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी-17 500/ लाइफटाइम
साउथ डिवीजीनल स्टेट लाइब्रेरी-34 600/ लाइफटाइम
गांधी स्मारक भवन लाइब्रेरी 500/ मासिक
द्वारकादास लाइबेरी-15 1500/वार्षिक, 300/मासिक
(नोट : सेक्टर-17 और सेक्टर-34 की लाइब्रेरी में मेंबरशिप बंद करने पर 500 रुपये रिफंड किए जाएंगे। वहीं द्वारकादास लाइब्रेरी में वार्षिक मेंबर बनने पर 700 रुपये रिफंडेबल हैं।)