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मतदान से पहले हाईकोर्ट पहुंचे 4 चुनावी विवाद

Fri, 20 Feb 2015 10:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब में निकाय चुनाव के लिए मतदान से पूर्व कई विवाद सामने आ चुके हैं। यह विवाद हाईकोर्ट भी पहुंच रहे हैं। उम्मीदवारों का प्रचार अभियान जैसे-जैसे जोर पकड़ रहा है, कोर्ट में याचिकाओं का दौर भी शुरू हो गया है। ऐसे ही दो मामले में कोर्ट ने पंजाब सरकार से 20 फरवरी तक जवाब दाखिल करने को कहा है।  
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गुरु हरसहाय के कांग्रेसी नेता को नामांकन से रोकने पर विवाद
हाईकोर्ट पहुंचा पहला मामला गुरु हरसहाय का है। यहां के कांग्रेसी नेता अनीश कुमार व अन्य ने अपनी याचिका में कहा है कि नामांकन दाखिल करने जाते वक्त ट्रैफिक जाम था। एसडीएम कार्यालय पहुंचे तो वहां अकाली समर्थकों व उम्मीदवारों ने उन्हें अंदर घुसने से रोक दिया। दिया। इस बीच एसडीएम ने भी देर से पहुंचने की बात कह कर नामांकन पत्र लेने से मना कर दिया। एडिशनल एडवोकेट जनरल विनोद भारद्वाज ने बेंच को बताया कि 12 से तीन बजे के बीच 22 नामांकन मंजूर किए गए। बाद में नामांकन पत्र का समय समाप्त हो गया। उधर, मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी पक्ष से सवाल किया है कि क्या यह सभी नामांकन एक ही पार्टी के थे। बाद में आए उम्मीदवारों के नामांकन क्यों नहीं लिए गए।

मोहाली में नामांकन रद्द करने पर आपत्ति
दूसरा मामला मोहाली के-वार्ड नंबर 49 का है। इस मामले में याची शिअद के सुखदेव सिंह पटवारी का नामांकन रद्द करने के मामले में कहा गया है कि नामांकन रद्द करने के पीछे दी गई दलील गलत है। नामांकन रद्द करने के कारण के बारे में कहा गया था कि वोट का क्रमांक नगर निगम के लिए बनाई गई वोटर सूची से भिन्न है, जबकि पटवारी की ओर से कोर्ट में पेश वकील सत्यपाल जैन ने कहा है कि यदि नामांकन पत्र में कोई खामी थी तो इसे दूर करने की जिम्मेदारी रिटर्निंग अफसर है। रिटर्निंग अफसर ने अपनी ड्यूटी नहीं निभाई और नामांकन गलत रद्द किया।
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एक याचिका खारिज, याची पर जुर्माना
तीसरे मामले में धनौला के दर्शनपाल ने अपनी याचिका में कहा कि पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड, सीबीएसई व आईसीएसई की ओर से आयोजित 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों की परीक्षाएं 22 फरवरी से दो मार्च के बीच है। इससे उनकी परीक्षा की तैयारी प्रभावित होगी। इसे लेकर उनके अभिभावक भी चिंतित हैं। याची की मांग है कि साल 2008 की भांति इस वर्ष भी निकाय चुनाव जून में ही करवाए जाएं। इस पर जस्टिस हेमंत गुप्ता की बेंच ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या वह छात्र है। न का जवाब मिलने पर याचिका खारिज कर दी गई। साथ ही याची पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगा दिया गया।

वार्डबंदी पर उंगली उठाने वालों को मिली मायूसी
एक अन्य मामला रोपड़ का है। इसमें रोपड़ के हरप्रीत शर्मा, अवनिंदर सिंह व गुरविंदर सिंह ने अपनी याचिका में कहा है कि नई वार्डबंदी के वक्त कई आपत्तियां दर्ज कराई गईं। इन आपत्तियों पर सुनवाई के बगैर वार्डबंदी का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया। आरोप लगाया कि वार्ड 14 पहले पुरुष सामान्य वर्ग व वार्ड 13 महिला सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित था, लेकिन अब इन वार्डों के आरक्षण में गैरजरूरी बदलाव किया गया है।

ऐसा चंद नेताओं को लाभ पहुंचाने के लिए जानबूझकर किया गया है। उन्होंने वार्डबंदी का नोटिफिकेशन रद्द करने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी।
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