चंडीगढ़ के तीन मामले सुलझे, रुपये ट्रांसफर होने वाले खातों के जरिये पकड़े आरोपी
संवाद न्यूज एजेंसी
चंडीगढ़। साइबर थाने ने चंडीगढ़ के अलग-अलग तीन मामलों में ऑनलाइन करोड़ों की ठगी करने वाले 4 आरोपियों को गुजरात से गिरफ्तार किया है। आरोपियों में गुजरात का धर्मेंद्र सिंह (28), ठाकुर गौतम मावाजी (24), पटेल हिरेन कुमार उर्फ मुकेश कुमार (34) और वघेला प्रफुल (42) शामिल है।
सेक्टर-21 निवासी कनव खन्ना के साथ ब्लैकरॉक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए ऑनलाइन निवेश के नाम पर एक करोड़ 8 लाख 50 हजार रुपये की ठगी हुई थी। ठग ने पीड़ित को व्हाट्सएप ग्रुप एफएफ ब्लैकरॉक इन्वेस्टमेंट इंस्टीट्यूट में जोड़ा गया। शुरुआत में मुनाफा दिखाकर विश्वास पक्का किया गया। लेकिन निवेश की गई रकम मांगने पर धमकी देकर और पैसे डलवाने को कहा गया। पुलिस ने जांच की तो पता चला कि 49 लाख गुजरात के माधव प्रजापति के खाते में ट्रांसफर हुए हैं। जिसे गुजरात के बोटाद जिले के बारवाला से गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसने 20 हजार रुपये कमीशन पर खाता खुलवाकर एटीएम व केवाईसी किट दूसरों को सौंप दी थी।
पीड़ित से कहा- आपके पार्सल में नशीला पदार्थ मिला
सेक्टर 40 के रहने वाले सतिंदरपाल सिंह चहल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया उसे एक फर्जी कॉल आई थी। पीड़ित को कहा गया कि उसके नाम पर आए फेडएक्स पार्सल में नशीला पदार्थ मिला है। आरोपी ने विश्वास दिलाकर स्काइप एप डाउनलोड करवाया गया और बैंक की डिटेल्स ले ली गईं। इसके बाद उसके नाम से 10 लाख का लोन पास करवाकर 9 लाख 76 हजार 400 रुपये पंजाब नेशनल बैंक में ट्रांसफर कर लिए गए। पुलिस जांच में पता चला कि रकम गुजरात में इस्तेमाल हुई। जिसके बाद पुलिस ने गुजरात के जिला मेहसाणा के विजापुर से आरोपी ठाकोर गौतम मवाजी और पटेल हीरेन कुमार उर्फ मुकेश कुमार को गिरफ्तार किया।
वहीं मनीमाजरा निवासी विकास शर्मा को व्हाट्सएप ग्रुप कॉआइन डीसीएक्स-8 इन्वेस्टमेंट इंस्टीट्यूट में जोड़ा गया। ठगों ने उसे ऑनलाइन टास्क व सर्वे व निवेश के नाम पर ठगी की गई। जांच में सामने आया कि 3 हजार 740 की ट्रांजेक्शन मिस्टर वघेला प्रफुल के नाम पर रजिस्टर्ड खाते में हुई। पुलिस ने गुजरात के भरूच से वघेला प्रफुल को गिरफ्तार किया।
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जागरूकता ही ठगी से बचने का रास्ता
साइबर क्राइम की इंचार्ज इंस्पेक्टर ईरम रिजवी ने बताया कि साइबर ठगी से बचने का केवल जागरूकता ही रास्ता है। ऐसे में
व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिये होने वाले निवेश घोटालों से सावधान रहें। वीडियो कॉल पर नकली गिरफ्तारी वारंट या फर्जी अधिकारी दिखाकर डराने की कोशिश की जा सकती है। लेकिन कभी पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य एजेंसी वीडियो कॉल नहीं करती। अगर ऐसी किसी की कॉल आती है तो समझ जाना चाहिए कि वह ठग है। कभी भी सत्यापन, गिरफ्तारी से बचने या झूठे मामलों को निपटाने के नाम पर पैसा ट्रांसफर न करें। कोई भी एजेंसी पीड़ित से पैसे नहीं मांगती। अगर कोई पैसे मांग रहा है तो वह ठग है।
ठग मोबाइल पर भेजते हैं फर्जी लिंक, ओपन करते ही हो जाता है खाता खाली
ईरम रिजवी ने बताया कि किसी भी व्यक्ति का व्हाट्सएप पर मैसेज या कॉल आती है तो पूरी तरह से वेरिफाई करने के बाद ही उससे बात करें। किसी भी व्यक्ति के कहने पर उसे अपने दस्तावेज और बैंक डिटेल न भेजें। मोबाइल पर आने वाले किसी भी लिंक को ओपन न करें। चूंकि लिंक ओपन करते ही हमारे मोबाइल का एक्सेस ठग के पास चला जाता है। फिर ठग कहीं भी बैठकर सभी जानकारियां ले सकता है। जैसे गूगल का पासवर्ड, ईमेल आईडी, तस्वीरें। एक्सेस जाने से आरोपी गूगल पे से पेमेंट करेगा तो मोबाइल पर आने वाले ओटीपी को भी वह खुद भर सकता है। ग्राहक सेवा के लिए गूगल सर्च इंजन पर ठगों ने जाल बिछा दिया है। नंबर सर्च करने पर ठगों से संपर्क हो जाता है। आरोपियों को ग्राहक सेवा का कर्मचारी समझकर हम सभी जानकारियां दे देते हैं, जिससे आरोपी आसानी से ठगी कर लेते हैं।