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Chandigarh News: चालीस हजार की आबादी, पर यूजीआर की सुरक्षा के लिए चहारदीवारी तक नहीं

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चंडीगढ़। धनास के स्मॉल फ्लैट्स में करीब 40 हजार लोग रहते हैं, लेकिन हैरानी की बात है कि यहां के भूमिगत जलाशय (यूजीआर) की सुरक्षा के लिए आज तक चहारदीवारी नहीं बनाई गई है। करीब 10 साल से प्रशासन, नगर निगम और हाउसिंग बोर्ड एक दूसरे के पाले में गेंद डाल रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां से पूरा धनास पानी पीता है, वह जगह ही सुरक्षित नहीं है। किसी भी दिन जाने-अनजाने कोई बड़ा हादसा हो सकता है।बीते रविवार को धनास में आयोजित अमर उजाला आपके द्वार कार्यक्रम में कई लोगों ने इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि स्पष्ट नियम है कि किसी भी यूजीआर को खुला नहीं छोड़ा जा सकता। उसके आसपास चहारदीवारी होनी चाहिए लेकिन धनास में गरीब लोग रहते हैं, इसलिए प्रशासन को उनकी समस्याओं से कोई फर्क नहीं पड़ता। कई लोगों ने कहा कि जमीन के नीचे एकत्रित पानी पूरे धनास के लोगों के घरों तक भेजा जाता है। यूजीआर के अंदर से एयर प्रेशर की कई पाइपें बाहर निकली हुईं हैं, जो खुले में हैं। कुछ तो टूट भी रही हैं। खुले में होने की वजह से अगर किसी ने शरारती तत्व ने पानी में कुछ गिरा दिया या गलती से गिर गया तो बड़ी समस्या पैदा हो सकती है। यह बेहद खतरनाक है। कहा कि शहर में जहां-जहां भी यूजीआर बनाए गए हैं, उसके आसपास चहारदीवारी का निर्माण किया गया है लेकिन धनास में नहीं। लोगों ने यूजीआर की सफाई नहीं होने की भी बात कही। कहा कि इससे पानी गंदा घरों में आ रहा है, जिससे लोग बीमार हो रहे हैं।
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वर्षों से इधर-उधर भी घूम रही है फाइल
वर्ष 2019-20 में भी धनास के यूजीआर की चहारदीवारी का मुद्दा जोर-शोर से उठा था। तत्कालीन वित्त सचिव अजॉय कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी, जिसमें सुरक्षा कारणों के चलते आदेश दिया गया था कि धनास के दोनों यूजीआर के पास चहारदीवारी बनानी चाहिए। मुख्य अभियंता ने प्रस्ताव को मुख्य वास्तुकार के पास भेजा। वहां से मामला हाउसिंग बोर्ड के पास गया था। जून 2021 में हाउसिंग बोर्ड ने नगर निगम को पत्र लिख दिया, लेकिन कई साल बीतने के बाद भी इस मामले की फाइल अब तक इधर से उधर घूम रही है। किसी ने भी इस मामले पर गंभीरता से कार्य नहीं किया।

क्या होता है यूजीआर
भूमिगत जल जलाशय यानी यूजीआर। यहां पानी को एकत्रित किया जाता है। इसके कई फायदे होते हैं। यूजीआर में सतही जलाशयों की तरफ पानी का रिसाव नहीं होता और वाष्पीकरण भी न के बराबर होता है। भूमिगत पानी जहां इस्तेमाल करना हो, वहीं प्राप्त किया जा सकता है। सतह के जलाशय बनाने के लिए बड़ी जगह ढूंढनी पड़ती है और पानी के बंटवारे का प्रबंधन बहुत महंगा होता है, जबकि यूजीआर को बनाने में खर्च भी कम आता है।
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हम पिछले कई वर्षों से यूजीआर के पास चहारदीवारी के निर्माण की मांग कर रहे हैं। चहारदीवारी का नहीं होना सुरक्षा की दृष्टि से भी खतरनाक है। अधिकारियों को मामले की गंभीरता को समझना चाहिए और जल्द यूजीआर के चहारदीवारी बनाना चाहिए।
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- रामचंदर यादव, स्थानीय पार्षद
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