चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के पूर्व वीसी प्रो. एके ग्रोवर ने पीयू को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि महिला प्रोफेसर की ओर से जो यौन शोषण के झूठे आरोप लगाए गए थे, उसमें उन्हें क्लीनचिट मिल गई है। ऐसे में अब पीयू सांसदों, विधायकों और अफसरों को पत्र भेजकर यह बताए कि उन पर लगे आरोप गलत थे। साथ ही महिला प्रोफेसर पर फिर से कार्रवाई की मांग उठाई है।
पीयू की एक महिला प्रोफेसर ने चार साल पहले पीयू के वीसी रहे प्रो. एके ग्रोवर पर सेक्सुअल हरासमेंट आदि के आरोप लगाए थे। यह प्रकरण कई जगह पहुंचा। मामला हाईकोर्ट तक भी पहुंचा। चांसलर कार्यालय की ओर से जांच कमेटी बनाई गई। उस कमेटी की रिपोर्ट सामने आए तो पूर्व वीसी पर लगे आरोप गलत साबित हुए। उसमें कहा गया है कि महिला प्रोफेसर को जांच के लिए कई बार बुलाया गया, लेकिन वह उपस्थित नहीं हो पाई। इससे लगता है कि वह अपनेे आरोपों पर कायम नहीं हैं। ऐसे में पूर्व वीसी प्रो. ग्रोवर को एक तरह से क्लीनचिट मिल गई। उन्होंने पीयू से कहा था कि महिला प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाए। कहा कि इस प्रकरण से पीयू की छवि भी खराब हुई है और शिक्षकों में एक गलत संदेश भी गया है।
पीयू ले रहा है कानूनी राय
सूत्रों का कहना है कि पीयू अभी इस प्रकरण पर कानूनी या अन्य राय लेगा। उसके बाद अगला कदम उठाएगा। सूत्रों का यह भी कहना है कि पंजाब विश्वविद्यालय शायद ही कोई पत्र जनप्रतिनिधियों को भेजे, क्योंकि ऐसा करने से पहले सिंडिकेट में यह प्रस्ताव पास करवाना होगा। सिंडिकेट में इस बात की अनुमति मिलना मुश्किल लग रहा है।
सभी लोगों को था जांच रिपोर्ट का इंतजार
द्भ चार साल पहले यह आरोप लगे तो मामला सुर्खियों में आ गया। पूरे देश में यह बात फैल गई। जानकारों ने सोचा कि किसी विश्वविद्यालय का मुखिया इतना बड़ा काम कैसे कर सकता है। इस बात को लेकर प्रो. ग्रोवर भी हैरान थे। उन्होंने कहा कि वह कई साल से तनाव में थे, लेकिन उन्हें न्याय पर भरोसा था। कहा कि कमेटी की ओर जो जांच की जा रही थी उसकी रिपोर्ट का सभी इंतजार कर रहे थे और आज वह रिपोर्ट सामने है।