गुरुद्वारा साहिब के बाहर उनके स्वागत के लिए खड़े स्थानीय लोगों ने सिद्धू के गले में हार डाला। सिद्धू ने गाड़ी में खड़े होकर लोगों का हाथ जोड़कर अभिनंदन किया। ब्लैक कमांडों से घिरे सिद्धू लगभग डेढ़ साल बाद वेरका पहुंचे। मीडिया को उम्मीद थी कि 19 दिन बाद बाहर निकले नवजोत सिद्धू उनके सवालों के उत्तर देंगे। सिद्धू घर से अपने सुरक्षा कर्मचारियों को निर्देश दे कर चले थे कि उनके आसपास मीडिया कर्मी न फटकें।
मीडिया ने जब सिद्धू से सवाल पूछे, तब वह हाथ जोड़कर चुप रहने का संदेश दे रहे थे। मीडिया द्वारा पाकिस्तान के साथ पैदा हो रहे तनाव और दोनों देशों के बीच व्यापार बंद होने से होने वाले नुकसान के पूछे सवाल का उत्तर भी सिद्धू ने नहीं दिया। सिद्धू ने करतारपुर कॉरिडोर पर भी बोलने से इंकार कर दिया। स्ट्रीट लाइट का उद्घाटन करने के बाद सिद्धू ने गुरुद्वारा नानकसर में माथा टेका।
इसके बाद सिद्धू मोहन नगर गए। बीते कई साल से गंदे नाले की समस्या से जूझ रहे स्थानीय लोगों की शिकायतों को सिद्धू ने पहले तो गाड़ी में बैठ कर सुना। कुछ देर के बाद गाड़ी से निकले और स्थानीय लोगों के साथ समस्या के बारे में बात की। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि आगामी कुछ महीनों के भीतर उनकी समस्याएं हल कर दी जाएंगी।
जब सिद्धू स्थानीय निकाय मंत्री थे तो विरोध के बावजूद मेयर करमजीत सिंह रिंटू उनके द्वारा किए गए उद्घाटन समारोह में हाजिरी भरते रहे थे। सिद्धू ने गुरुवार को अपनी विधानसभा हलके में स्ट्रीट लाइट का उद्घाटन किया, तो वहां पर न मेयर हाजिर थे और न ही स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का कोई अधिकारी। नगर सुधार ट्रस्ट के चेयरमैन दिनेश बस्सी के साथ-साथ कोई भी बड़ा कांग्रेसी नेता मौजूद नहीं था। सिद्धू ने इन इलाकों का दौरा चुनाव जीतने के बाद पहली बार किया है।