मोहाली/चंडीगढ़। गांव माजरिया-स्यूंक की शामलात जमीन को भू-माफिया व राजस्व विभाग के अधिकारियों ने मिलकर बेच डाली और करोड़ों हड़प लिए। दो साल की जांच के बाद ईडी ने मनी लांड्रिंग एक्ट में केस दर्ज कर पूर्व नायब तहसीलदार वरिंदरपाल सिंह धुत को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को शुक्रवार को जिला अदालत में पेश कर चार दिन का रिमांड लिया है। इससे पहले मामले की जांच कर विजिलेंस ने केस दर्ज किया था। इससे पहले जांच में सामने आया था कि 1946-47 से लेकर 1999-2000 तक के रिकॉर्ड के मुताबिक इन गांवों की जमीन शामलात रही है। कभी भी बिजाई योग्य नहीं थी। इस कारण इस जमीन का कब्जा साबित नहीं किया जा सकता है, जबकि राजस्व विभाग के अधिकारियों नायब तहसीलदार वरिंदरपाल सिंह धुत, रघबीर सिंह कानूनगो, इकबाल सिंह हलका पटवारी ने शाम लाल प्रॉपर्टी डीलर के साथ मिलकर फर्जी तरीके से जमीन की रजिस्ट्री व इंतकाल किए। इससे जहां सरकार को करोड़ों का चूना लगा, वहीं, लाखों रुपये की रिश्वत ली। आरोपियों ने गांव की 1295 एकड़ जमीन में से 24 हिस्सेदारों की 117 एकड़ जमीन के हिस्से कम कर दिए, जबकि ऐसे हिस्सेदार जोड़ दिए जो कि गांव के निवासी नहीं थे। इनमें राम कृष्ण और कुलविंदर सिंह के हिस्से अधिक पाए गए। इस तरह जमीन के हिस्से बढ़ाने और घटाने में 99 एकड़ 4 कनाल 14.32 मरले जमीन का फर्क पड़ा। इस इंतकाल के बाद यह जमीन आनंद खोसला, निशान सिंह आदि लोगों को बेच दी गई।
खातों में आए करोड़ों रुपये
जांच में एजेंसी ने पाया था कि धुत और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में करीब 15 करोड़ रुपये की राशि आई है। आरोपी ने खरीदारों से अपने रिश्तेदारों के बैंक खातों में पैसे डलवाए जबकि भूमि के लिए अधिकांश बिक्री का लेनदेन नकद में किया गया था। उक्त शामलात जमीन की कीमत 50 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है।