हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि एसवाईएल के मसले पर अब कोई किंतु-परंतु की बात ही नहीं है। इस मामले में न ही पंजाब से किसी तरह की बात करने की जरूरत है। जरूरत है तो सिर्फ केंद्र सरकार पर दबाव बनाए जाने की, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यदि पंजाब अपने अड़ियल रवैये पर रहता है तो एसवाईएल नहर का निर्माण करवाना केंद्र सरकार की ही जिम्मेवारी बनती है।
हुड्डा ने अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में बातचीत के दौरान कहा कि एसवाईएल केमामले में कांग्र्रेस ने किसी भी प्रकार की देरी नहीं की है। हुड्डा के अनुसार यूपीए के कार्यकाल में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने पंजाब को एसवाईएल नहर बनाने के आदेश दिए थे, जबकि 2002 में कांग्रेसी सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से भी इस बाबत मिला था, जिसमें वे खुद भी शामिल थे।
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उन्होंने कहा कि एसवाईएल नहर निर्माण का सारा प्लेटफार्म कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में तैयार कर दिया था। जबकि सुप्रीम कोर्ट का भी इस पर फैसला आ गया था, लेकिन पंजाब में अकाली-भाजपा सरकार ने इसका विरोध किया। जिस वजह से नहर निर्माण का काम लटका।
'इनेलो की ड्रामेबाजी से लटका एसवाईएल का निर्माण'
Bhupinder singh hooda
हुड्डा ने कहा कि अब भी एसवाईएल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्पष्ट है, लेकिन मनोहर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एग्जीक्यूशन ऑफ आर्डर की अपील डाली हुई है, जिस वजह से केस और लटक रहा है। दूसरा, इनेलो इस पर जलयुद्ध का ड्रामा कर इसका श्रेय लेने की होड़ में लगी है, इसलिए मामला और लटक रहा है।
हुड्डा ने कहा कि इस मामले में हरियाणा के सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर केंद्र पर दबाव बनाने की जरूरत है। केंद्र सरकार अब सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करवाए, वह अपनी जिम्मेवारी से न भागे। उन्होंने कहा कि सीएम मनोहर इस मामले में पीएम मोदी से फिर से वक्त लें और सर्वदलीय नेतागण भी पीएम से मिलकर नहर निर्माण के लिए दबाव बनाएं।
पूर्व सीएम हुड्डा ने पंजाब के एसवाईएल के बदले यमुना का पानी देने की बात को खारिज करते हुए कहा कि यमुना का पानी पर हरियाणा का हक है, पंजाब बिना वजह की बात कर एसवाईएल से ध्यान भटकाने का प्रयास न करे।
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