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मानेसर जमीन घोटालाः CBI कोर्ट पंचकूला से हुड्डा को मिली जमानत, जानिए पूरा मामला

Tue, 01 May 2018 03:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Bhupinder Singh Hooda - फोटो : File Photo
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बहुचर्चित मानेसर जमीन घोटाला केस में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौ. भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मंगलवार को सीबीआई कोर्ट ने जमानत दे दी। मामले में आरोपी हुड्डा पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई कोर्ट में पेश हुए। भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ उनके बेटे सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा, विधायक करण सिंह दलाल, आनंद सिंह दागी, ललित नागर सहित कुछ पूर्व विधायक समर्थक उपस्थित थे। वहीं मामले में सुनवाई के बाद हुड्डा को सीबीआई कोर्ट ने जमानत दे दी है।
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गौरतलब है कि हुड्डा को पहले 19 अप्रैल को कोर्ट में पेश होना था, लेकिन बीमारी का हवाला देते हुए उन्होंने व्यक्तिगत पेशी से छूट ले ली थी। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें एक मई को अदालत में पेश होने के लिए कहा था। 19 अप्रैल को इस केस में आरोपी हुड्डा के पूर्व प्रधान सचिव एमएल तायल, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के पूर्व मुख्य प्रशासक एसएस ढिल्लो, संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य पूर्व आईएएस अफसर छतर सिंह को उनकी उपस्थिति के बाद जमानत दे दी गई थी, जबकि सीबीआई ने उनकी याचिका का विरोध किया था।

साथ ही तत्कालीन जिला नगर नियोजन अधिकारी जसवंत सिंह को भी जमानत दे दी गई थी। उनके अलावा गुडग़ाव स्थित रियल्टी फर्म एबीडब्लू समूह के प्रमोटर अतुल बंसल, जिनकी 15 कंपनियों को आरोपपत्र में नामित किया गया है, क्योंकि इस घोटाले के प्रमुख लाभार्थी हैं, को भी जमानत दी गई थी। इसके अलावा बिल्डर वरिंद्र जैन और नवीन राव समेत अन्य बिल्डरों की जमानत याचिका स्वीकार कर ली गई थी।
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क्या है मामला

hooda
सीबीआई ने इस आरोप पर मामला दर्ज किया था कि 27 अगस्त 2004 से 27 अगस्त 2007 के बीच निजी बिल्डरों ने हरियाणा सरकार के अज्ञात जनसेवकों के साथ मिलीभगत कर गुड़गांव जिले में मानसेर, नौरंगपुर और लखनौला गावों के किसानों और भूस्वामियों को सरकार द्वारा अधिग्रहण का भय दिखाकर उनकी करीब 400 एकड़ जमीन औने-पौने दाम पर खरीद ली थी।

सितंबर 2015 को भाजपा सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। इस मामले में ईडी ने हुड्डा के खिलाफ सितंबर 2016 में मनी लॉन्ड्रिंग का भी केस दर्ज किया था। ईडी ने हुड्डा और अन्य के खिलाफ सीबीआई की एफआईआर के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज किया था।

400 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई
केस में हुड्डा समेत 34 के खिलाफ 400 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई, जिसने बिल्डरों में हड़कंप मचा दिया। करीब 1500 करोड़ के घोटाले के आरोप में सीबीआई ने विशेष अदालत में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित कुल 34 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की। चार्जशीट फाइल करने के लिए निजी बिल्डरों के काले कारनामों से संबंधित दस्तावेजों से भरी अलमारी भी पंचकूला पहुंचाई गई।

चार्जशीट में इनका भी नाम
आदित्य बिल्डवेल (दिल्ली), जस्सुम एस्टेट्स(दिल्ली), जस्सुम टावर प्रा. लि.(दिल्ली), जस्सुम इंफ्रास्ट्रक्चर(दिल्ली), मेसर्र्स बीटा प्रमोटर्स (दिल्ली), दिव्य ज्योति इंटरप्राइजेज(दिल्ली),  मेसर्र्स एनसीआर प्रॉपर्टीज प्रमोटर्स लि.(दिल्ली), मेसर्स इंडो एशियन कंस्ट्रक्शन(दिल्ली), मेसर्र्स डगमैन इंजीनियर्स प्रा. लिमिटेड(दिल्ली), मेसर्स गैलेक्सी कालोनाइजर्स(दिल्ली),  माऊंट वैली एस्टेट्स, (दिल्ली),  मिराज ओवरसीज प्रा. लिमिटेड (दिल्ली),  मेसर्र्स यार्क्स होटल प्रा. लिमिटेड(दिल्ली), मेसर्र्स शील बिल्डॉन प्रा. लिमिटेड,  मेसर्र्स प्रोगेसिव बिल्डटेक(दिल्ली),  इकोटेक बिल्डकॉन(दिल्ली), दिल्ली की कंपनी कॉनवे डवलेपर्स के डायरेक्टर एके बतरा, नवीन राव(दिल्ली), गिरनार इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. (दिल्ली) के डायरेक्टर रमेश चन्द्रा,  गिरनार इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. (गुरुग्राम), फ्लेयर रियलटर्स (दिल्ली) के विजय नागर, फ्लेयर रियलटर्स के डायरेक्टर गौरव चौधरी, मेसर्स मेट्रोपॉलिस के विजय नागर,  अर्ल इंफोटेक के पदम सिंह, गुरुनानक इंफ्रास्ट्रक्चर, फगवाड़ा (पंजाब), एंजलीक इंटरनेशनल (दिल्ली), कॉनवे डेवलपर्स (दिल्ली),  वीरेन्द्र कुमार जैन, रोहिणी(दिल्ली)
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ये हैं हुड्डा पर आरोप

कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा
कांग्रेस की तत्कालीन हुड्डा सरकार के कार्यकाल के दौरान करीब 900 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर उसे बिल्डर्स को औने-पौने दाम पर बेचने का आरोप है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल के दौरान मानेसर, नौरंगपुर और लखनौला में करीब 912 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी की गई थी।

ग्रामीणों को सेक्शन 4, 6 और 9 के नोटिस थमा दिए थे। इसके बाद हरियाणा सरकार से पहले कुछ निजी बिल्डरों ने किसानों को अधिग्रहण की धमकी देकर उनकी जमीन औने-पौने दाम में खरीदनी शुरू कर दी। यह पूरा घटनाक्रम तत्कालीन सरकार के संरक्षण में चल रहा था।

इसी दौरान उद्योग निदेशक ने सरकारी नियमों की अवहेलना करते हुए बिल्डर द्वारा खरीदी गई जमीन को अधिग्रहण प्रोसेस से रिलीज कर दिया। आरोप है कि निजी बिल्डरों ने तत्कालीन सरकार तथा संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर करीब 400 एकड़ जमीन को खरीदा था।

अधिसूचना रद्द करने से नाखुश किसान सीबीआई जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे। इसके बाद मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।
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