फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विरोधियों का चक्रव्यूह भेदने को बेताब हरियाणा के पूर्व सीएम हुड्डा, खेल रहे शह और मात का 'खेल'

Mon, 19 Aug 2019 01:18 PM IST
खुशबू गोयल प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
भूपेंद्र सिंह हुड्डा
विज्ञापन
हरियाणा की राजनीति में शह और मात का खेल खेल रहे पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने विरोधियों का राजनीतिक चक्रव्यूह भेदने के लिए तानाबाना बुन लिया है। दस साल तक प्रदेश में सत्तासीन रहे  हुड्डा अब और ज्यादा दिन राजनीतिक भंवर में फंसे रहने के मूड में नहीं हैं। अपनी खुद की पार्टी में लड़ाई लड़ रहे और विपक्ष के हमले झेल रहे हुड्डा ने रोहतक की महापरिवर्तन रैली में इस बात के साफ संकेत दे दिए हैं। हालांकि, हुड्डा सियासी ताकत दिखाने में तो कामयाब रहे, लेकिन कोई बड़ा फैसला लेने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।
विज्ञापन


समर्थक विधायकों ने तो एक लाइन का प्रस्ताव पारित कर बड़ी लड़ाई लड़ने का फैसला हुड्डा पर छोड़ दिया, मगर हुड्डा ने कांग्रेस से इतर जाने का फैसला लेने के लिए कमेटी बनाने का एलान कर दिया। उम्मीद की जा रही थी कि हुड्डा की रैली से पहले आलाकमान से मुलाकात हो सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब कमेटी में हुड्डा अपने समर्थक 13 कांग्रेस विधायकों और नेताओं को शामिल करेंगे। कमेटी की घोषणा पूर्व सीएम जल्दी ही चंडीगढ़ में करेंगे। इस कमेटी के फैसले के अनुसार ही हुड्डा आर-पार की लड़ाई शुरू करेंगे।

उन्हें यह फैसला लेने के लिए इसलिए मजबूर होना पड़ा है, चूंकि कांग्रेस आलाकमान से फ्री हैंड नहीं मिल रहा। समर्थक विधायक लंबे समय से हुड्डा को कमान सौंपने की मांग करते आ रहे हैं। बावजूद इसके पार्टी नेतृत्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर को बदलने के मूड में नहीं है। जिसे देखते हुए सत्ता में वापसी के लिए समर्थक विधायकों और नेताओं ने हुड्डा पर अपनी राहे कांग्रेस से जुदा करने का दबाव बनाया हुआ है। पांच साल हुड्डा पर जहां एक के बाद एक अनेक मुकदमे दर्ज हुए हैं, वहीं विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्रीय जांच एजेंसियों का शिकंजा भी उन पर कसता जा रहा है।
विज्ञापन


ऐसे में पार्टी का पूरा साथ न मिलने पर हुड्डा के पास बड़ा फैसला लेने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। समर्थक विधायकों और नेताओं के दबाव में हुड्डा क्या फैसला लेंगे, इस पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हैं।

अनुच्छेद-370 हटाने के मुद्दे पर मोदी के साथ

पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा अनुच्छेद-370 हटाने के मुद्दे पर कांग्रेस पर निशाना साधने से भी नहीं चूके। हुड्डा ने बिना नाम लिए कहा कि इस मुद्दे पर हमारी पुरानी पार्टी भटक गई है। यह वह कांग्रेस नहीं है जो पहले थी। जब बात देशभक्ति और आत्मसम्मान की हो तो मैं कोई समझौता नहीं करुंगा। अनुच्छेद हटाने के मुद्दे पर वह नरेंद्र मोदी सरकार के साथ हैं, लेकिन हरियाणा में सीएम मनोहर लाल से बात नहीं बनेगी।

36 बिरादरी को साधने के लिए 4 डिप्टी सीएम का फार्मूला
पूर्व सीएम हुड्डा ने महापरिवर्तन रैली के लिए एक तीर से कई निशाने साधे हैं। उन्होंने जहां कांग्रेस आलाकमाने को सोचने के लिए समय दिया है, वहीं हरियाणा की 36 बिरादरी को साधने के लिए चार डिप्टी सीएम का फार्मूला भी पेश कर दिया। खुद को सीएम प्रोजेक्ट करने के साथ ही हुड्डा ने एक डिप्टी सीएम बीसी-ए, एक एससी, एक ब्राह्मण समाज और एक अन्य समुदाय से बनाने की बात कही है।

घोषणा पत्र के सहारे चुनावी वैतरणी पार करने की कोशिश
पूर्व सीएम ने सत्ता वापसी के लिए लोकलुभावन घोषणा पत्र जनता के समक्ष पेश कर वाहवाही तो खूब बटोरी। हुड्डा इसके सहारे चुनावी वैतरणी पार लगाना चाहते हैं। अब देखना यह है कि क्या वह इसके जरिए सत्तासीन हो पाते हैं या नहीं। अपने घोषणा पत्र में उन्होंने हर वर्ग से बड़े वादे किए हैं।
विज्ञापन

लोकसभा चुनाव में खा चुके करारी शिकस्त, विस चुनाव में कड़ी चुनौती

बीते लोकसभा चुनाव में कांग्रेस करारी हार झेल चुकी है। भाजपा ने सभी दस सीटें जीतकर क्लीन स्वीप किया है। यहां तक कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा सोनीपत और दीपेंद्र हुड्डा रोहतक सीट भी नहीं बचा सके। अब विधानसभा चुनाव में एक बार फिर हुड्डा की अग्निपरीक्षा है, क्योंकि प्रदेश में कांग्रेस का संगठन भाजपा के मुकाबले काफी कमजोर है। बीते पांच साल में जिलाध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्तियां तक नहीं हो पाई हैं। अशोक तंवर भी पार्टी को एक सूत्र में पिरोने में कामयाब नहीं हो पाए। पार्टी छह गुटों में बंटी हुई है। ऐसे में विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।

गुलाम नबी आजाद ने  रैली से किया किनारा
हरियाणा कांग्रेस प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने भी हुड्डा की महापरिवर्तन रैली से दूरी बनाए रखी। आजाद के रैली में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थीं। लेकिन, रैली में उनके न आने से सारे कयासों पर विराम लग गया। वैसे भी अनुच्छेेद-370 हटाने के मुद्दे पर आजाद और हुड्डा का स्टैंड अलग-अलग है। आजाद पार्टी के साथ हैं तो हुड्डा देश की भावनाओं के साथ।

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें