पुलिस जवानों द्वारा डीजीपी के खिलाफ वायरल की गई चिट्ठी
यूटी पुलिस के जवान अपने मुखिया से इतने परेशान हो चुके थे कि उन्होंने सोशल मीडिया में एक चिट्ठी भी वायरल करवा दी। इस चिट्ठी में उनके खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग किया गया था। लेकिन डीजीपी ने यह चिट्ठी लिखने का षड्यंत्र रचने वालों के खिलाफ अंदरखाते जांच करवाई और यूटी पुलिस के ही तीन जवानों के खिलाफ बाकायदा एक केस भी दर्ज करवाया गया। हालांकि वह मामला
बाद में ठंडे बस्ते में चला गया और उन जवानों के खिलाफ कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।
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रातोंरात ट्रांसफर के आदेशों ने हिलाई डीजीपी की कुर्सी
वहीं, एक अप्रैल की देर रात को गृहमंत्रालय की ओर से एक आदेश जारी किया गया जिसमें डीजीपी सुरेंद्र सिंह यादव का तबादला चंडीगढ़ से दिल्ली बीएसएफ में बतौर डीआईजी के पद पर कर दिया गया। आईपीएस यादव को तुरंत प्रभाव से दिल्ली मुख्यालय में रिपोर्ट करने के लिए कहा गया। यादव ने यूटी पुलिस के किसी भी अफसर से बातचीत तक नहीं की और न ही अपनी कोई विदाई पार्टी करवाई।
रातोंरात उन्होंने ट्रक भरकर अपना सामान दिल्ली भेज दिया और सुबह होते ही खुद भी दिल्ली पहुंच गए।
मुखालफत में मिली छत्तीसगढ़ नक्सल विरोधी मुख्यालय की कमान
इन तबादला आदेशों के खिलाफ आईपीएस एसएस यादव ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अपने से जूनियर अधिकारी के नीचे डीआईजी लगाए जाने वाले आदेशों को चुनौती दी। लेकिन कोर्ट ने भी इस आवेदन पर कोई खास गौर नहीं किया और इसे खारिज कर दिया। इसी बीच दिल्ली बीएसएफ मुख्यालय से गृह मंत्रालय ने उन्हें राजस्थान आईपीएस पुलिस एकेडमी में ओरिएंटेशन के लिए भेज दिया और अब उन्हें वहां से छत्तीसगढ़ में नक्सल एरिया में भेज दिया गया है जहां उनका कार्यस्थल नक्सल विरोधी अभियान कमान मुख्यालय होगा।