चंडीगढ़। यूटी प्रशासन ने इंटर ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस ) 2.0 प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए दो महत्वपूर्ण कमेटियों का गठन किया है। एक कमेटी के अध्यक्ष प्रशासक के सलाहकार राजीव वर्मा, जबकि दूसरी कमेटी के अध्यक्ष डीजीपी हैं। कमेटियों में प्रशासन, पुलिस व अन्य कई विभागों के अधिकारी सदस्य बनाए गए हैं।
बनाई गई पहली कमेटी स्टेट अपेक्स कमेटी (एसएसी) है। इसकी अध्यक्षता प्रशासक के सलाहकार करेंगे जबकि दूसरी कमेटी स्टेट एंपावर्ड कमेटी (एसईसी) है, जिसकी अध्यक्षता डीजीपी करेंगे। स्टेट अपेक्स कमेटी में गृह सचिव, डीजीपी, जेल के आईजी, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल, चंडीगढ़ के डायरेक्टर ऑफ प्रॉसीक्यूशन, एसएसपी, सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के डायरेक्टर, एनआईसी के स्टेट इनफॉर्मेटिक्स ऑफिसर और नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के प्रतिनिधि शामिल हैं। आईसीजेएस मुख्य आईटी प्रणाली के एकीकरण के लिए एक राष्ट्रीय प्लेटफार्म है, जिसका उपयोग पांच स्तंभों के माध्यम से देश में आपराधिक न्याय को लागू करने के लिए किया जाता है। इसमें पुलिस (अपराध और आपराधिक ट्रैकिंग और नेटवर्क प्रणाली), फोरेंसिक लैब के लिए ई-फोरेंसिक, न्यायालयों के लिए ई-कोर्ट, लोक अभियोजकों के लिए ई-प्रॉसीक्यूशन और जेलों के लिए ई-जेल है। इस प्रोजेक्ट के तहत प्रणाली को ''एक देश, एक डेटा, एक एंट्री'' प्रणाली के सिद्धांत पर तैयार किया जा रहा है, जिसके तहत डेटा केवल एक स्तंभ में केवल एक बार दर्ज किया जाता है और फिर वही डेटा अन्य सभी स्तंभों में उपलब्ध होता है। इसके लिए प्रत्येक स्तंभ में डेटा को फिर से दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होती है।