पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पार्टी के प्रदेश नेतृत्व पर बड़ा प्रहार किया है। दस साल तक प्रदेश के सीएम रहे हुड्डा ने रविवार को कहा कि हरियाणा में कांग्रेस के कमजोर होने का मुख्य कारण पार्टी के पदाधिकारी हैं। प्रदेश के कमजोर नेतृत्व के कारण ही हरियाणा में कांग्रेस कमजोर पड़ी है। पार्टी के पदाधिकारी जनता के हितों की लड़ाई नहीं लड़ पाए।
कमजोर नेतृत्व का ही परिणाम है कि पिछले पांच सालों में पार्टी पदाधिकारी प्रदेश में बूथ, ब्लॉक और जिला स्तर पर संगठन नहीं खड़ा कर पाए। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कांग्रेस के कमजोर नेतृत्व का खामियाजा लोकसभा चुनाव में पार्टी को भुगतना पड़ा।
इस बारे में वह कई बार पार्टी के केंद्रीय नेताओं को भी अवगत करवा चुके हैं, लेकिन अभी तक उन्होंने हरियाणा के इन कमजोर पदाधिकारियों के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया है। उन्होंने कहा कि अब वह हरियाणा में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए अपने स्तर पर लड़ाई लड़ेंगे। कांग्रेस के विधायकों के साथ बैठकर आगामी रणनीति बनाई जाएगी।
उम्मीद है राहुल गांधी त्यागपत्र वापस लेंगे
केंद्रीय स्तर पर पार्टी में नेतृत्व के असमंजस के सवाल पर हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस बहुत पुरानी पार्टी है। इस तरह की दुविधा इसमें पुराने समय से चलती आ रही है। कांग्रेस में हमेशा ही दो तरह के गुट रहे हैं। एक गरम और दूसरा नरम। उम्मीद है कि राहुल गांधी जल्द ही अपना त्यागपत्र वापस लेकर पार्टी को दोबारा से खड़ी करने के लिए रणनीति तैयार करेंगे।
प्रदेश में झूठे वादों की सरकार
हुड्डा ने कहा कि प्रदेश में झूठे वादों की सरकार है। भाजपा ने पांच सालों में एक भी वादा पूरा नहीं किया। मुख्यमंत्री टेल तक पानी पहुंचाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन खुद उनके गांव के लोग ही इससे इत्तफाक नहीं रखते। नरवाना में धरोदी के लोग पानी के लिए 39 दिनों से धरना दे रहे हैं, लेकिन भाजपा सरकार उनकी समस्या की तरफ ध्यान नहीं दे रही है।
प्रदेश में भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार
पूर्व सीएम हुड्डा ने कहा कि लोकसभा चुनाव में मोदी लहर व छद्म राष्ट्रवाद के नाम पर भाजपा को वोट मिले हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव में मुद्दे अलग होंगे। विधानसभा चुनाव में हम सरकार की गलत नीतियों व हमारे शासनकाल की उपलब्धियों को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ेंगे। हरियाणा में लोगों का भाजपा से भरोसा उठ चुका है। माइनिंग, बिजली मीटर खरीद, ओवर लोडिंग, हरियाणा रोडवेज की किलोमीटर स्कीम, हर जगह भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार है।
भाजपा पूरी तरह से पेपर लीक सरकार साबित हुई है। भाजपा के शासनकाल में नौकरियां खुलेआम बिक रही हैं। यह प्रदेश की पहली सरकार है जिसके शासनकाल के दौरान एचएसएससी के चेयरमैन तक भ्रष्टाचार के आरोप में सस्पेंड हुए हैं। प्रदेश में कानून व्यवस्था खत्म हो चुकी है। 2011-12 में प्रदेश में बेरोजगारी दर 2.8 थी, लेकिन आज यह दर बढ़कर 8.6 तक पहुंच चुकी है।