पांच सिंह साहिबान की ओर से डेरा सिरसा मुखी संत राम रहीम सिंह के माफीनामे पर जारी विवाद और बढ़ गया है। एसजीपीसी हाउस ने मंगलवार को एक प्रस्ताव पारित डेरामुखी को माफ करने के फैसले को सही करार देते हुए सिखों से इस हुक्मनामे को मानने की अपील की है।
वहीं इस फैसले के खिलाफ दल खालसा, सिख छात्र संघ, अकाली दल पंच प्रधानी और सिख यूथ फेडरेशन ने श्री अकाल तख्त साहिब के बाहर प्रदर्शन कर जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह समेत अन्य पांचों तख्तों के जत्थेदारों को भी तुरंत पदों से हटाए जाने की मांग की। जबकि पूर्व जत्थेदार जोगिंदर सिंह वेदांती और दमदमा साहिब के पूर्व जत्थेदार बलवंत सिंह नंदगढ़ ने कहा कि डेरा मुखी को माफी देने वाले पांचों जत्थेदारों को तत्काल पद से हटा देना चाहिए।
एसजीपीसी की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया गया कि जब श्री अकाल तख्त साहिब ने डेरा मुखी के खिलाफ हुक्मनामा जारी किया गया था तब भी एसजीपीसी ने उसे पूरी तरह लागू किया था। अब जब डेरा मुखी ने खुद माफी के लिए प्रार्थना पत्र दिया है तो पांच सिंह साहिबान ने लंबी विचार चर्चा के बाद उन्हें माफ कर दिया है।
इन आदेशों को भी एसजीपीसी लागू करेगी। माफीनामे इस अपील प्रस्ताव को एसजीपीसी अध्यक्ष अतवार सिंह मक्कड़ की ओर से हाउस के सामने पढ़कर सुनाया गया।
उधर अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार जोगिंदर सिंह वेदांती और दमदमा साहिब के पूर्व जत्थेदार बलवंत सिंह नंदगढ़ ने कहा कि पांच सिंह साहिबानों को अकाल तख्त पर पेश कर सजा सुनाई जानी चाहिए। दोनों पूर्व जत्थेदारों ने बुधवार को आधे दिन के पंजाब बंद पर जनता और सिख कौम से अपील की कि वह शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर अपना रोष व्यक्त करें।
पूर्व जत्थेदार और दमदमी टकसाल के प्रधान राम सिंह मंगलवार को जालंधर स्थित गुरुद्वारा दीवान अस्थान सेंट्रल टाउन में पहुंचे थे। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि अगर पांचों जत्थेदार मानते हैं कि उन्होंने संत को माफी देकर सही फैसला लिया है तो उन्हें खुले में आकर बहस करनी चाहिए।