चंडीगढ़। शहर में पर्यावरण सुरक्षा के प्रति अलख जगा रहे एलआर बुडोलिया ने पिछले आठ साल से घर और दुकान पर पॉलिथीन का उपयोग नहीं किया है। उनका कहना है कि थैला थोड़ा मंहगा है, लेकिन पर्यावरण सुरक्षा और स्वास्थ्य से बढ़कर नहीं, इसलिए दुकान पर आने वाले लोगों से भी अपील करते हैं कि कृपया पॉलिथीन का उपयोग न करें।
सेक्टर 36 स्थित बुडोलिया बुक शॉप के संचालक एलआर बुडोलिया का कहना है कि लगभग आठ साल पहले कुछ लोग आए थे कि 50 माइक्रोन से कम की पॉलिथीन का उपयोग नहीं करें। यह पर्यावरण के लिए काफी घातक है। उसके बाद एलआर बुडोलिया ने कपड़ों का थैला बनाने वाले से संपर्क किया और हर साल कॉन्ट्रैक्ट करने की बात कही। सहमति मिली तब से दुकान पर आने वाले ग्राहकों को अब कपड़े के बैग में ही किताबें देते हैं। बुडोलिया का कहना है कि थैला ढाई रुपये का एक मिलता है, वहीं पॉलिथीन का 25 रुपये में पैकेट आ जाता था। जब बात सुरक्षा की आती है तो यह फर्क कोई मायने नहीं रखता। बुडोलिया ने बताया कि घर में भी पुराने कपड़ों से बनाए थैलों का ही प्रयोग किया जाता है। इन पर जब डिजाइन करने के बाद मार्केट से आने वाले थैले की तरह ही दिखते हैं।
एलआर बुडोलिया एक पर्यावरणविद होने के साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। लगातार जगह-जगह कार्यक्रम भी आयोजित करते हैं। उनका कहना है कि छोटे-छोटे दुकानदारोें पर जुर्माना लगाकर मात्र पेड़ की पत्तियों को काटा जा रहा है। यदि प्लास्टिक को बंद करना है तो पेड़ को जड़ को काटना होगा। प्लास्टिक बनाने वाली कंपनियों को बंद कराएं और इसकी सप्लाई पर रोक लगे तब यह प्रयास सार्थक होगा।
एलआर बुडोलिया ने बताया कि एक दिन एक सब्जी की रेहड़ी पर दुकानदार से पूछा कि कहां से लाते हो पॉलिथीन। सुबह के समय सप्लाई होती है। क्विंटल में पॉलिथीन आती है और दुकानदारों व रेहड़ी वालों को सहजता से उपलब्ध होती है। यदि इस पर रोक लग जाए तो किसी को उपलब्ध ही नहीं होगी प्लास्टिक।