चंडीगढ़। उत्तर भारत में पीजीआई ने पहली बार स्मार्टनेव सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर एडवांस्ड कॉक्लियर इंप्लांट करने में सफलता हासिल की है। यह सर्जरी ओटोलरींगोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. जमयंती बक्शी ने अपनी टीम के साथ किया है। डॉ. जमयंती ने बताया कि यह सर्जरी 9 साल की बच्ची आरीका की हुई है। सर्जरी के बाद आरीका के माता-पिता को स्मार्टनेव के परिणाम के बारे में भी विस्तार से बताया गया है। यह एडवांस सर्जरी मरीज की देखभाल और सर्जरी के परिणाम को बेहतर बनाने में सहायक है। उन्होंने बताया कि यह नई तकनीक कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी के दौरान इंट्राऑपरेटिव माप के लिए गेम चेंजर है क्योंकि स्मार्टनेव का उपयोग न केवल सर्जिकल सफलता दर को बढ़ाता है बल्कि विकिरण के संपर्क और सर्जरी की समय सीमा को कम कर मरीज की सुरक्षा को मजबूत करता है। सर्जरी करने वाली टीम में शामिल डॉ. धर्मवीर और डॉ. नूरैन आलम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. जमयंती ने बताया कि स्मार्ट सॉफ्टवेयर कॉक्लियर इंप्लांट तकनीक में एक बड़ी उपलब्धि है। यह नया सॉफ्टवेयर प्रमुख सर्जिकल मैट्रिक्स जैसे गहराई, गति, न्यूरोलॉजिकल इफेक्ट संबंधित सूचनाओं को एक वायरलेस के माध्यम से प्रदर्शित करता है। यह वितरण इलेक्ट्रोड की सटीक स्थिति सुनिश्चित करने, इंट्राऑपरेटिव एक्सरे की जरूरत को कम करने और संभावित रूप से एनेस्थीसिया के समय को 15 से 20 मिनट तक कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अधिक सटीक इलेक्ट्रोड प्लेसमेंट के साथ मरीज को बेहतर श्रवण परिणाम प्राप्त करने और रिसर्जरी जैसी आवश्यकता को दूर करने की संभावना भी बढ़ता है। डॉ. जमयंती ने बताया कि पीजीआई में कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी की शुरुआत 2003 में हुई थी। तब से अब तक संस्थान ने 650 से ज्यादा मरीज का सफलतापूर्वक इलाज किया गया है। यह प्रक्रिया आमतौर पर 3 से 4 घंटे तक चलती है। इसमें ईएनटी सर्जन, ऑडियोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिक और ओटी के स्टाफ की एक विशेष टीम की जरूरत होती है। सर्जरी के दौरान इलेक्ट्रोड को आंतरिक कॉक्लियर में डाला जाता है।