नव नियुक्त पुलिसकर्मियों को राजपत्रित अवकाश के दिनों में काम करने के लिए मिलने वाले आर्थिक लाभ को सेवाओं का एक वर्ष पूरा होने की शर्त में नहीं बांधा जा सकता है। यदि पुलिसकर्मी ने इन अवकाशों पर काम किया है तो वह इसके लिए भुगतान के योग्य है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस पीबी बजंथरी ने यह आदेश सुनाते हुए हरियाणा के डीजीपी के उन आदेशों को खारिज कर दिया, जिनमें 13वें माह का वेतन पाने के लिए एक वर्ष पूरा करने की शर्त रखी थी। हाईकोर्ट का यह फैसला पुलिस में नव नियुक्ति पाने वालों केलिए बेहद अहम है।
मामले में सुरेंद्र सिंह व अन्य जेल वार्डरों की ओर से याचिका दाखिल कर कहा गया कि उन्हें अप्रैल 2013 में जेल वार्डर के रूप में नियुक्त किया गया था। इसके बाद हरियाणा के डीजीपी ने 11 मई 2015 को आदेश जारी कर कहा कि केवल उन्हीं लोगों के 13वें माह के वेतन का लाभ दिया जाएगा, जिन्होंने अपनी सेवाओं का एक वर्ष पूरा कर लिया हो। इसके साथ ही आदेशों में उन वार्डरों से वसूली के आदेश दिए थे, जिन्हें एक वर्ष पूरा न होने के बावजूद यह आर्थिक लाभ दे दिया गया था।
जेल वार्डरों को राहत देते हुए डीजीपी के आदेशों को हाईकोर्ट ने किया खारिज
Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
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इस फैसले को चुनौती देते हुए वार्डरों की ओर से एडवोकेट दीपक सोनक ने दलील दी कि इन पुलिसकर्मियों के अप्रैल माह में एक वर्ष पूरा होने में केवल 7 दिन कम थे। दिन गिनकर ऐसे कर्मी से लाभ नहीं छीना जा सकता, जब उसने गजटेड हॉलीडे पर काम किया हो।
वहीं सरकार ने कहा कि इससे पूर्व भी इस संदर्भ में सरकार आदेश जारी कर चुकी है और इसी आधार पर दिए गए वित्तीय लाभ वापस लेने का निर्णय लिया गया है। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद याचिका मंजूर करते हुए हरियाणा के डीजीपी के आदेशों को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कर्मी ने गजटेड हॉलीडे पर काम किया है तो उस काम के लिए निर्धारित वित्तीय लाभ को एक साल की सेवा की शर्त से नहीं बांधा जा सकता। ऐसे में डीजीपी के आदेश कानून की नजर में सही नहीं हैं। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने डीजीपी के आदेशों को खारिज कर दिया। वेतन से राशि की कटौती पर रोक लगा दी। जिन मामलों में वेतन की कटौती की गई हैं, उन्हें तीन माह के भीतर वार्डरों को वापस दिया जाए।
यह होता है 13वें माह का वेतन
पुलिस की नौकरी के दौरान कर्मियों को गजटेड हॉलीडे पर भी काम करना पड़ता है। इस एवज में पुलिस कर्मियों को एक माह की सैलरी बतौर वित्तीय लाभ दी जाती है। इसे ही 13वें माह के वेतन के रूप में जाना जाता है।