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बेहतर लेखन और रचनात्मक सोच के लिए रोज एक पेज जरूर लिखें: शैलजा कौशल

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चंडीगढ़। सृजनात्मक लेखन के लिए रोज लिखना जरूरी है। चाहे एक पेज ही सही। इससे लिखने की आदत विकसित होगी और सोच भी रचनात्मक होगी। लेखिका शैलजा कौशल ने कुछ इसी अंदाज में पत्रकारिता और लेखन से जुड़े विद्यार्थियों को लिखने के प्रति प्रेरित किया। एमसीएम डीएवी-36 कॉलेज की ओर से आयोजित विशेष ऑनलाइन सत्र में उन्होंने बात की।
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एमसीएम डीएवी-36 कॉलेज की पूर्व छात्रा शैलजा कौशल ने कहा कि इस कॉलेज से जुड़ना गर्व की बात रही। इसने न केवल ज्ञान दिया बल्कि चरित्र निर्माण भी किया। शैलजा ने तीन हिस्सों में अपने सत्र पर बात की। इसमें पत्रकारिता, रचनात्मक लेखन और किरदार पर बात की। उन्होंने विद्यार्थियों को देश में पत्रकारिता की शुरुआत से लेकर आज के बदले स्वरूप के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पहला अखबार देश में वर्ष 1780 में ‘द बंगाल गैजेट’ के नाम से प्रकाशित हुआ। उस दौरान अंग्रेज इसे अपने प्रचार के लिए इस्तेमाल करते थे। इसके बाद अखबार ने क्रांति का रूप लिया और इन दिनों हम डिजिटल माध्यम में पहुंच गए हैं। हालांकि आज भी लोग खबरों की पुष्टि के लिए अखबारों पर ही भरोसा करते हैं। शैलजा ने कहा कि पत्रकारिता में भविष्य बनाने के लिए जुनून और जज्बे की जरूरत होती है।
सत्र के दूसरे हिस्से में शैलजा ने विद्यार्थियों के साथ रचनात्मक लेखन से जुड़े सुझाव साझा किए। जितनी ज्यादा किताबें पढ़ेंगे उतना ही अच्छा। नए-पुराने लेखकों को जरूर पढ़ें। हिंदी, अंग्रेजी और पंजाबी तीनों ही भाषा के लेखकों को पढ़ें। ऐसे में आप भविष्य में स्क्रीन प्ले, कविता लेखन, गाने लिखने में अपना करिअर बना सकेंगे। जितना ज्यादा पढ़ेंगे उतना ही आप लेखक की लेखनी और उसके तरीके को समझेंगे। शैलजा ने इसके बाद विद्यार्थियों को चेतन भगत, झुंपा लाहड़ी, आमीष त्रिपाठी, मुंशी प्रेमचंद, अमृता प्रीतम के लेखन पर जानकारी दी। साथ ही उन्होंने रविंद्र नाथ टैगोर की कविता दो बिघा जमीन के फिल्म बनने तक की कहानी पर भी बात की।
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