प्रस्तुति देतीं विदूषी महालक्ष्मी शिनॉय।
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चंडीगढ़। 50वें भास्कर राव सम्मेलन के तीसरे दिन वीरवार को शास्त्रीय कलाकारों ने टैगोर थिएटर में दर्शकों की शाम को सुरमयी बना दिया। तीसरे दिन तीन कार्यक्रमों के तहत बांसुरीवादक पंडित राकेश चौरसिया, गायिका महालक्ष्मी शिनॉय और तबलावादक पंडित जयदेव ने प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में दर्शकों में ज्यादातर युवा शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत पंडित जयदेव ने की। उन्होंने पंजाब घराने के पारंपरिक तीन ताल में रेले, कायदे, पलटे इत्यादि के अलावा कुछ खास घरानेदार बंदिशें पेश कीं। इनके साथ हारमोनियम पर राजविंदर ने संगत की। पंडित जयदेव ने तबले की शिक्षा गुरु व पिता पंडित कालीराम से ली है।
दूसरे कार्यक्रम में शास्त्रीय गायिका महालक्ष्मी शिनॉय ने मंच संभाला। महालक्ष्मी ने राग कलावती में अलाप से शुरुआत की। इसके उपरांत उन्होंने विलम्बित एक ताल में निबद्ध बंदिश साजन घर आए पेश की। द्रुत तीन ताल में निबद्ध रचना तुम्हारे बिना मैं तो मरी जात पेश करने के बाद कार्यक्रम का समापन कन्नड़ और कोंकणी भजन के साथ किया। इनके साथ मंच पर अभिषेक मिश्रा ने तबले संगत की।
कार्यक्रम के अंतिम भाग में बांसुरीवादक पंडित राकेश चौरसिया ने शाम को सुरमयी बनाया। उन्होंने कार्यक्रम की शुरुआत राग दुर्गा से की। इसमें पारम्परिक अलाप से शुरू करके जोड़ एवं मध्य ताल में मधुर रचना प्रस्तुत की। इसके पश्चात राग किरवाणी में निबद्ध रचनाएं पेश कीं। कार्यक्रम के अंत में एक पहाड़ी धुन प्रस्तुत की। बांसुरी के मधुर स्वरों के बीच-बीच में ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। इनके साथ तबले पर तबलावादक पंडित रामकुमार मिश्रा ने बखूबी संगत की।
टैगोर में बांसुरी की प्रस्तुति देते पंडित राकेश चौरसिया।- फोटो : CHANDIGARH