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Chandigarh News: फ्लोरीनीकरण तकनीक से दवाएं बनेंगी ज्यादा असरदार, घटेंगे साइड इफेक्ट

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मोहाली। आज हर घर में कोई न कोई दवा का सेवन कर रहा है। ब्लड प्रेशर, शुगर या इंफेक्शन से जुड़ी बीमारियों के लिए जरूरी है कि दवाएं ज्यादा असरदार, कम साइड इफेक्ट वाली और सुरक्षित हों। इसी सोच के साथ नाइपर में अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला औषधीय रसायन में फ्लोरीनीकरण के रहस्यों की समझ की शुरुआत हुई।
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यह कार्यक्रम ग्लोबल इनिशिएटिव ऑफ एकेडमिक नेटवर्क्स (जीआईएएन) के तहत आयोजित किया गया है और 7 नवंबर तक चलेगा। इसमें भारत सहित कई देशों के वैज्ञानिक, विद्यार्थी और शोधकर्ता भाग ले रहे हैं। कार्यशाला का संचालन अमेरिका के पर्ड्यू विश्वविद्यालय के प्रो. रयान ए. ऑल्टमैन कर रहे हैं जो दवा निर्माण की दुनिया में बड़ा नाम हैं।
उन्होंने कहा कि फ्लोरीनीकरण तकनीक दवाओं को शरीर में अधिक समय तक सक्रिय रखती है और उनके असर को सुरक्षित बनाती है। यह भविष्य की औषधियों के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
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डॉ. दीपक बी. सालुंके और डॉ. मधुरी तानाजी पाटिल ने बताया कि इस तकनीक के जरिये ऐसी नई दवाओं पर काम किया जा सकता है, जो कम मात्रा में भी अधिक असर दिखाएं। इसका सीधा फायदा मरीजों को होगा। उद्घाटन सत्र में प्रो. गंगा राम चौधरी (पंजाब विश्वविद्यालय) और प्रो. गुर्जसप्रीत सिंह (जीआईएएन समन्वयक) विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।
प्रो. इंदर पाल सिंह, विभागाध्यक्ष, प्राकृतिक उत्पाद विभाग नाइपर ने कहा कि यह पहल केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है। इसका असर आम लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा। इस कार्यशाला में ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी विद्यार्थियों के साथ-साथ दवा उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने भी भाग लिया।
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