मधुबन में एफएसएल जांच को अब बार कोडिंग से किया जाएगा। लैब में आज से तीन नए नियम लागू होंगे। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को मधुबन कॉम्प्लेक्स स्थित न्याय वैधिक प्रयोगशाला भवन में बार कोडिंग सिस्टम की विधिवत शुरूआत की। डीजीपी मनोज यादव ने सीएम के सामने इस पूरे प्रोजेक्ट का श्रेय श्रीकांत जाधव को दिया। सीएम को बताया कि अब तक जांच रिपोर्ट को लेकर एफएलएल पर कोई आरोप नहीं लग पाएगा। जानकारी गुप्ता होने के कारण किसी प्रकार के भेदभाव की आशंका भी नहीं रहेगी।
बार कोड
जांच के लिए आई फाइल से एड्रेस को हटाकर उसको एक बार कोड दिया जाएगा। इससे जांच करने वालों को फाइल किस क्षेत्र की है, इस बारे में जानकारी नहीं होगी। आधुनिक कार्यप्रणाली का प्रयोग होगा। ऐसे में जांच पर किसी प्रकार का आरोप नहीं लग सकता।
समय सीमा
जांच के लिए समय सीमा तय की गई है। समय को जांच के कैटेगिरी के अनुसार रखा गया है। ऐसे में रिपोर्ट में देरी नहीं होगी। देरी होने का उचित कारण नहीं हुआ तो कार्रवाई का भी प्रावधान किया जाएगा। अब तक रिपोर्ट आने में देरी होने के आरोप लगते रहते थे।
ट्रैकिंग सिस्टम
एफएसएल का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी किसी घटना से संबंधित जांच पर जाएगा तो पूरी लोकेशन ट्रैक होती रहेगी। इससे पूरी जानकारी मिलेगी कि जांचकर्ता कब कहां पहुंचा और किस स्थान पर कितना समय रुका। ऐेसे में तथ्यों को उचित स्थान से जुटाया गया है या नहीं। इसकी पूरी इंफर्मेशन रहेगी।