कैथल। श्रीनगर में बाढ़ में फंसे कैथल के पांच परिवारों के सभी 21 सदस्य रविवार को घर लौट आए। इस पर परिजनों सहित इन लोगों ने राहत की सांस ली है। दोपहर के समय घर पहुंचते ही परिजनों एवं जानकारों का घर पर तांता लग गया। कश्मीर गए प्रवीण गुप्ता, सुनील गर्ग, नीरज गुप्ता, संजीव चौधरी व बृज गोयल ने बताया कि उन सभी की जान यदि बची है तो उसका श्रेय भारतीय सेना के जवानों को जाता है।
गुप्ता ने कहा कि चारों पानी ही पानी था। छोटे बच्च सहमे हुए थे। वे श्रीनगर में पहुंचे ही थी कि उसी समय बाढ़ आ गई। इस कारण वे घूम ही नहीं पाए। जिस दिन गए थे, उसी दिन से होटल में फंस गए। पहले ही दिन होटल में गैस खत्म हो गई। जिस कारण तीन दिनों तक आसपास के लोगों द्वारा दिए गए राशन से भूख मिटाई।
सिग्नल नहीं, कई किमी दूर से साधा संपर्क
होटल में फोन के सिग्नल नहीं थे। कई किलोमीटर दूसरे शहर में जाकर घर पर टेलीफोन करना पड़ा। उन्होंने बताया कि 13 सितंबर को वे होटल से सेना के ट्रक से श्रीनगर टेक्निकल हेलिपैड पहुंचे। वहां हजारों की संख्या में फंसे हुए यात्रियों को देख श्रीनगर एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए, जहां उन्हें चंडीगढ़ के लिए हवाई टिकट नहीं मिल पाई। इसके बाद वे फिर टेक्निकल एयरपोर्ट पहुंचे तथा सेना के जहाज द्वारा उन्हें पठानकोट उतारा गया। जहां से वे टैक्सी कर कैथल लौटे। कैथल लौटने पर प्रवीन गुप्ता, शुभम गुप्ता, नीरू गुप्ता ने बताया कि वे अब कभी कश्मीर में घूमने के लिए नहीं जाएंगे। सभी लोग दहशत के साए में थे।
वापसी से एक दिन पहले सब कुछ ठप
सुरक्षित लौटे लोगों ने बताया कि आठ सितंबर को घर लौटना था। लेकिन सात को लाइट, मोबाइल सहित अन्य सुविधाएं बिलकुल बंद हो गई। ऊंचाई पर होने के कारण वह पानी के बहाव में नहीं फंसे। वहां पर प्रशासन द्वारा कोई व्यवस्था नहीं थी। कोई भी प्रशासन का अधिकारी नजर नहीं आया।
श्रीनगर से हेलिकॉप्टर में बैठने के बाद तबाही का मंजर देखा। हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा था। घर, गाड़ियां, शहर पानी में डूबे हुए हैं। आर्मी के जवान दिन रात एक करके जान हथेली पर रखकर लोगों को बचा रहे हैं। अगर आर्मी नहीं होती, तो लोगों को निकालना मुश्किल होता।