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फ्लैट ट्रांसफर से जुड़ी बेहद अहम खबर

Wed, 12 Nov 2014 12:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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यूटी प्रशासन की ओर से शहर के दक्षिणी सेक्टरों में बनी हाउसिंग सोसाइटियों के फ्लैट्स के सीधे ट्रांसफर पर लगभग दस महीने पहले लगाई गई रोक को जल्द हटाया जाएगा। इससे सोसाइटी में रहने वाले लोगों को राहत मिलेगी। रोक हटने के बाद अब फ्लैट को ट्रांसफर कराना महंगा हो जाएगा।
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जानकारी के अनुसार ए कैटेगरी के फ्लैट को ट्रांसफर कराने के लिए लोगों को लगभग साढ़े पांच लाख रुपये खर्च करने होंगे। जबकि बी कैटेगरी के फ्लैट के ट्रांसफर पर साढ़े तीन लाख रुपये तक खर्च करने होंगे।

हाउसिंग सोसाइटियों का कलेक्टर रेट 30, 888 रुपये प्रति स्कवेयर फुट है। फ्लैट को ट्रांसफर कराने के लिए रजिस्ट्री करानी होगी और यह रजिस्ट्री इस्टेट आफिस से होगी।
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निर्धारित प्रक्रिया से ही होगा फ्लैट ट्रांसफर

पहले इस्टेट ऑफिस सोसाइटियों के मकान मैनेजमेंट फीस लेकर ट्रांसफर कर देता था। इसमें ए कैटेगरी के लिए 50 हजार, बी कैटेगरी के लिए 25 हजार और सी कैटेगरी के लिए 15 हजार रुपये फीस ली जाती थी। फीस काफी कम होने से इन सोसाइटियों में फ्लैटों के ट्रांसफर से प्रशासन को कम आमदनी हो रही थी।

प्रशासन ने अपने घाटे को पूरा करने के लिए इस साल जनवरी में फ्लैटों के ट्रांसफर पर रोक लगा दी थी। उपायुक्त की ओर से जारी आदेशों में कहा गया था कि कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटीज के फ्लैट्स और शेयर ट्रांसफर डायरेक्ट खरीद-फरोख्त के आधार पर हो रहा है, जो सही नहीं है।

आदेशों के अनुसार फ्लैट्स की ट्रांसफर के लिए निर्धारित प्रक्रिया ही अपनाई जानी चाहिए। इसके लिए लीज होल्ड फ्लैट को पहले फ्री होल्ड करवाना होगा। फ्री होल्ड करवाने के बाद खरीदार को इसकी रजिस्ट्री करवानी होगी। तभी फ्लैट और सोसाइटी का शेयर उसके नाम ट्रांसफर हो सकेगा।
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रूक गया था फ्लैट ट्रांसफर का काम

आदेशों में स्पष्ट था कि ऐसी हाउसिंग सोसाइटियां जिनकी अलॉटमेंट फ्री होल्ड के आधार पर हुई है उनके मेंबर्स के फ्लैट भी तभी ट्रांसफर हो सकेंगे जब वह कलेक्टर रेट अदा करके कन्वेयंस डीड करवाएंगे।

बेचने वाले के लिए यह जरूरी है कि वह कन्वेयंस डीड करने से पहले इस्टेट ऑफिस से एनओसी जरूर ले। प्रशासन के इस फरमान से सोसाइटियों में फ्लैटों के ट्रांसफर का काम पूरी तरह से रुक गया था, क्योंकि शहर में ऐसी सिर्फ 36 हाउसिंग सोसाइटियां ही हैं, जिन्हें जमीन फ्री होल्ड पर मिली है।

बाकी की 76 हाउसिंग सोसाइटियों को जमीन लीज होल्ड पर मिली हैं जोकि 99 साल के लिए है, लेकिन अब रोक हटने के बाद फ्लैट ट्रांसफर हो सकेंगे। हालांकि इसके लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे।
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