हरियाणा सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हाईवे से पांच सौ मीटर के भीतर स्थित पब-बार और डिस्को बंद होने से खट्टर सरकार को पांच सौ करोड़ की चपत लगेगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश लागू होने के बाद भले ही शराब कारोबारी व पब-बार व्यवसायी सड़कों पर विरोध का बिगुल फूंक चुके हों, लेकिन सरकार के सामने फिलहाल कोई विकल्प नहीं है। सरकार फैसले के खिलाफ केवल अपील में ही जा सकती है, जिसके भी फिलहाल कोई ठोस संकेत नहीं मिले हैं।
उच्चतम न्यायालय का आदेश आने के बाद सरकार ने देश के अटार्नी जनरल और हरियाणा के एडवोकेट जनरल से पब-बार में शराबबंदी को लेकर राय ली थी, जिसमें आदेशों का कोई असर न पड़ने की बात कही गई थी, लेकिन पहली अप्रैल से लागू हुए ताजा आदेशों में पब-बार और डिस्को भी पांच सौ मीटर के दायरे में लाए गए हैं। इससे शराब कारोबारियों और व्यवसायियों में हड़कंप मचा हुआ है।
आबकारी एवं कराधान विभाग ने भी बार-पब में शराबबंदी के बाद होने वाली वित्तीय हानि को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी शुरू कर दी है। विभाग के प्रधान सचिव संजीव कौशल और आबकारी एवं कराधान आयुक्त श्यामल मिश्रा पब-बार और डिस्को में शराब बिक्री के साथ ही प्राप्त होने वाले राजस्व के आंकड़े जुटा रहे हैं। उन्हें आबकारी एवं कराधान मंत्री कैप्टन अभिमन्यु को भी इससे अवगत कराना है।