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थियेटर के शौकीन हैं, तो 7 जनवरी से देखने आएं ये नाटक, फेस्ट का उद्देश्य भी बेहद खास

Thu, 03 Jan 2019 02:45 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्ले, ड्रामा, थियेटर - फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ में अब पूरे 5 दिन ट्राइसिटी थिएटर फेस्टिवल का आनंद मिलेगा। यह जानकारी चंडीगढ़ टैगोर थिएटर के निर्देशक कुलदीप शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि इस फेस्टिवल के अंतर्गत पांच नाटकों का मंचन किया जाएगा। इसमें परंपरा आर्ट्स, दृष्टि थिएटर क्लब, मेहताब आर्ट्स सोसायटी, चंडीगढ़ स्कूल आफ ड्रामा और थिएटर आर्ट्स चंडीगढ़ जैसे नामी गिरामी थिएटर ग्रुप भाग लेंगे। इस फेस्टिवल में होने वाले नाटकों में राजा की रसोई, भगत सिंह की कहानी, दुर्गा भाभी की जुबानी, सारी रात, होली और झना दे पानी शामिल हैं।
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इसका मंचन सात जनवरी से 11 जनवरी तक किया जाएगा। चंडीगढ़ टैगोर थिएटर के डायरेक्टर कुलदीप शर्मा ने टैगोर थिएटर में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान बताया कि इस थिएटर फेस्टिवल का उद्देश्य कलाकारों को प्रोत्साहन देना है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में होने वाला यह फेस्ट एकदम अलग है। इसमें पांच ग्रुप सेलेक्ट किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ग्रुपों को इसके लिए तीस हजार रुपये की ग्रांट दी जाती है। इसके साथ ही अबकी बार सभी ग्रुपों को टिकट बेचने के लिए कहा गया है। इसके अच्छे रिजल्ट आएंगे।

अकादमी प्रमोट करें ग्रुपों को
चंडीगढ़ टैगोर थिएटर के डायरेक्टर कुलदीप शर्मा ने कहा कि उनकी कोशिश है कि ग्रुपों को प्रमोट किया जाए। इसके लिए सिर्फ टैगोर थिएटर सोसायटी ही नहीं बल्कि चंडीगढ़ की अकादमियां भी होनी चाहिए। इसका अलग रिजल्ट होगा। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में कई नामी गिरामी थिएटर ग्रुप हैं जो कि बेहतर काम करना चाहते हैं।
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ललित शर्मा का पहला नाटक होगा होली

एक बेहतरीन एक्टर और डायरेक्टर ललित शर्मा अब अपने प्ले होली के लिए तैयार हैं। ललित शर्मा का यह नाटक हास्टल पर आधारित है। इसमें दिखाया गया है कि किस तरह से रैगिंग होती है। इसमें दिखाया जाएगा कि कालेज में होली की छुट्टी कैंसल कर दी जाती है क्योंकि कालेज में एक कल्चरल प्रोग्राम है। इसके बाद कालेज के स्टूडेंट्स तय कर लेते हैं कि कल्चरल प्रोग्राम में हंगामा करेंगे। वह गुस्से में वहां जाते हैं और चीफ गेस्ट की बेइज्जती कर देते हैं। उसमें से एक लड़का सभी का नाम बता देता है। उसके बाद सभी उसके रैगिंग करते हैं और ऐसी रैगिंग करते हैं वह आत्महत्या कर लेता है।

एक महिला की मनोदशा दिखाएगा सारी रात
मुनीष कपूर द्वारा निर्देशित नाटक सारी रात बादल सरकार का लिखा नाटक है। यह नाटक एक लड़की पर आधारित है जो कि अपने जीवन साथी रंजन की एक तस्वीर अपने दिमाग में बना लेती है। वह इस कैरेक्टर को छोड़ नहीं पाती है। जब उसकी शादी होती तो भी वह अपने दिमाग में बनाई गई उस तस्वीर से बाहर नहीं निकल पाती है। शादी के सात साल बाद पति और पत्नी शादी के बाद घूमने जाते हैं तो एक बुजुर्ग की कुटिया में उनको शरण लेनी पड़ती है। बुजुर्ग उस लड़की की हालत को समझ जाता है। वह सोचता है कि कहीं लड़की तबाह न हो जाए। ऐसे में वह उसे कई जानकारियां देता है। इसमें इच्छा लड़की का कैरेक्टर करेंगी और वृद्ध का कैरेक्टर विनोद करेंगे।
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शहीद भगत सिंह पर देखिए खास नाटक

राजीव मेहता का निर्देशित नाटक भगत सिंह की कहानी दुर्गा भाभी की जुबानी एक खास नाटक होगा। इसके बारे में राजीव मेहता ने बताया कि भगत सिंह जब फ्रीडम मूमेंट में आए तो उस समय हिंदुस्तान सोशल रिपब्लिक एसोसिएशन थी। उन्होंने इसको ज्वाइन किया। उन्होंने कहा कि इस मूवमेंट में शहीद चंद्रशेखर आजाद, अशफाक उल्ला खान, राम प्रसाद बिस्मिल, भगवती चरण वोहरा जैसे क्रांतिकारी थे। दुर्गा वास्तव में भगवती चरण वोहरा की पत्नी थीं। इसमें दुर्गा भाभी शहीद भगत सिंह के बारे में जानकारी देंगी। दुर्गा भाभी के कैरेक्टर में सुदामिनी होंगी।

इकत्तहर सिंह का नाटक होगा जबरदस्त
इकत्तहर सिंह का निर्देशित नाटक झना दे पानी एक ऐसी लड़की की कहानी है जिसको बिहार से खरीद कर लाया गया है। इस लड़की को ऐसा किसान खरीद कर शादी कर लेता है जो कि खुद कर्ज में डूबा हुआ है। किसान उनकी भेड़ चराता है। किसान की मजबूरी का लाभ उठाकर जागीरदार उसको पकड़ लाता है। उसके बाद उस लड़की को एक फौजी ले जाता है। लड़की जब फौजी के पास आती है तो वह फौजी के खिलाफ साजिश करने वालों के खिलाफ बगावत कर देती है।

राजा की रसोई एकदम मस्त कहानी
कुलबीर विर्क द्वारा निर्देशित नाटक राजा की रसोई एक खास नाटक है जिसको मोहन महर्षि ने लिखा है। इसको उन्होंने संस्कृत शैली में लिखा है। इस नाटक की कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जो कि राजा बन जाता है। वह एक इमानदार इंसान है। वह चालीस दिन का व्रत रखता है चालीस दिन के व्रत के बाद जब वह खाने के लिए तैयारी करता है तो उस समय मांस की तलाश में रसोई जगह जगह तलाश करता है, लेकिन उसको मांस नहीं मिलता एक व्यक्ति वहां भिक्षा लेने आता है। रसोइयां उसको ही मारकर राजा को खिला देता है। राजा मांस खाने के बाद कहता है कि यह किसका मांस है, रसोइया डर जाता है, लेकिन राजा कहता है कि उसे यह पसंद आया और रोज ऐसा ही मांस चाहिए। इस नाटक में जसबीर कुमार, सर्वप्रीत, हिमांशु, गुरतेज पंडित एक्ट कर रहे हैं।
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