चंडीगढ़। सेक्टर-7 के आर्य समाज में वेद प्रचार सप्ताह के तहत श्रावणी पर्व शुरू हुआ। इस मौके पर आध्यात्मिक वैदिक व्याख्यान और भजनों का पांच दिवसीय कार्यक्रम शुरू हुआ। आर्य जगत के विद्वान आचार्य राजू वैज्ञानिक ने प्रवचन किए। उन्होंने कहा कि शब्द उत्तम कामनाओं की पूर्ति करते हैं। पुरुषार्थ से ही वेद की जो प्रज्वलित होती है। ऋषियों, महात्माओं, योगियों ने ईश्वर का साक्षात्कार किया। हमें उनके वचनों को जीवन में ढालने का प्रयास करना चाहिए। महर्षि दयानंद सरस्वती ने बताया है कि मानव तन अमूल्य है। विकारों ने मानव को पीड़ित कर दिया है। वह दबा हुआ अनुभव करता है। उन्होंने कहा कि मानव तन पाकर भी खुद को निर्धन समझने लगा है। यह शरीर मनुष्य को यूं ही नहीं मिला है। इसकी कीमत चुकानी पड़ती है। यह मानव तन जीव के अच्छे कर्म और ईश्वर के न्याय के कारण ही प्राप्त हुआ है। उपेंद्र आर्य ने भजन प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का समापन 3 अगस्त को होगा।