चंडीगढ़। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम की ओर से अतिक्रमण और अवैध वेंडरों के खिलाफ चलाया गया पांच दिन का विशेष अभियान जमीनी स्तर पर बेअसर रहा है। 18 से 22 दिसंबर तक चले अभियान के दौरान नगर निगम ने 738 चालान काटे। प्रति चालान औसतन करीब दो हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया जिससे निगम को लगभग 14.76 लाख रुपये का राजस्व मिला लेकिन इसके बावजूद शहर के बाजारों से अतिक्रमण हटता नजर नहीं आ रहा।
सेक्टर-22, सेक्टर-37, सेक्टर-15, पटेल मार्केट, मनीमाजरा, सेक्टर-21 समेत अधिकतर प्रमुख बाजारों में हालात पहले जैसे ही बने हुए हैं। निगम की टीम के पहुंचते ही अतिक्रमण करने वालों को पहले से सूचना मिल जाती है। नतीजतन, ज्यादातर वेंडर और दुकानदार अस्थायी तौर पर सामान अंदर कर लेते हैं और कार्रवाई खत्म होते ही दोबारा फुटपाथों और सड़कों पर कब्जा कर लेते हैं।
लोगों का कहना है कि जब तक निगम की टीम मौके पर रहती है, तब तक बाजारों में रास्ते साफ दिखते हैं लेकिन टीम के जाते ही हालात फिर वही हो जाते हैं। इससे पैदल चलने वालों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर अवैध वेंडरों के साथ नियमित दुकानदार भी सरकारी जमीन पर कब्जा किए हुए हैं।
करोड़ों की जमीन पर ढाबा, एक दिन में 92 चालान
सोमवार को सेक्टर-9सी में करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन पर अवैध रूप से ढाबा चला रहे एक वेंडर का सामान हटाया गया। वेंडर के पास लाइसेंस था लेकिन उसने हजारों वर्ग फुट जमीन पर कब्जा कर रखा था। सोमवार को 92 अवैध वेंडरों के चालान काटे गए।
व्यापार मंडल ने उठाए सवाल
चंडीगढ़ व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजीव चड्ढा ने कहा कि बाजारों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि अवैध वेंडर अब भी खुलेआम दुकानें लगा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार नगर निगम के पास अवैध वेंडरों को हटाने के लिए अब केवल दो दिन शेष हैं, जबकि स्टे वाले मामलों का निपटारा 21 दिन में करना होगा।
कोट
अभियान के बाद दोबारा अतिक्रमण होने की सूचनाएं मिल रही हैं। इसे लेकर विशेष रणनीति बनाई जाएगी और कार्रवाई और सख्त की जाएगी। -हरप्रीत कौर बबला, मेयर
पांच दिन में हुए चालान
18 दिसंबर: 310
19 दिसंबर: 123
20 दिसंबर: 87
21 दिसंबर: 126
22 दिसंबर: 92