फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रेमडेसिविर की अवैध सप्लाई के पांच आरोपियों को नहीं मिली जमानत

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। कोरोना के मरीजों के इलाज में इस्तेमाल किए जा रहे रेमडेसिविर इंजेक्शन का अवैध तरीके से उत्पादन कर सप्लाई करने के मामले में जिला अदालत ने पांच आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। इन आरोपियों में केरल निवासी फिलिप जैकब, केपी फ्रांसिस, दिल्ली निवासी सुशील कुमार, भोपाल निवासी प्रभात त्यागी, फार्मा कंपनी के डायरेक्टर और जीरकरपुर निवासी गौरव चावला शामिल हैं। अब मामले की अगली सुनवाई 31 मई को होगी।
विज्ञापन

आरोपियों ने अदालत में दायर जमानत याचिका में कहा है कि उन्हें झूठा फंसाया जा रहा। उनसे किसी प्रकार की कोई बरामदगी भी नहीं हुई है और न ही उन्हें किसी प्रकार का लाभ मिला है। केरल निवासी आरोपी अभिषेक की जमानत याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। वहीं,फार्मा कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर परमजीत अरोड़ा ने भी अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। इसके जवाब में पुलिस ने कहा था कि आरोपी परमजीत अरोड़ा ने अदालत के आदेश पर जांच तो ज्वाइन की, लेकिन पूछताछ में पुलिस का सहयोग नहीं किया। आरोपी के व्हाट्सएप चैट में रेमडेसिविर इंजेक्शन की बड़े स्तर पर कालाबाजारी के सुबूत मिले हैं, इसलिए उसकी न्यायिक हिरासत जरूरी है। परमजीत अरोड़ा के खिलाफ पुलिस ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने पर केस दर्ज किया था। आरोपियों और कर्मचारियों से पुलिस पूछताछ में सामने आया था डायरेक्टर के कहने पर ही उन्होंने दवा सप्लाई करनी थी।
सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि सभी आरोपी यह जानते हुए कि कोरोना के कारण देश कितने संकट से गुजर रहा है। इसके बावजूद मुनाफे के लिए देश की जनता से धोखाधड़ी करने की योजना बना रहे थे। इस केस की जांच अभी जारी है। अगर इन्हें जमानत दी गई तो यह फरार हो सकते हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पांचों आरोपियों की जमानत खारिज कर दी।
विज्ञापन

बता दें कि बीते 17 अप्रैल को सेक्टर-17 स्थित एक होटल से ऑपरेशन सेल की टीम को सूचना मिली थी कि वहां पर कुछ लोग रुके हुए हैं। ऑपरेशन सेल की टीम ने केरल निवासी अभिषेक, फिलिप जैकब, केपी फ्रांसिस, दिल्ली निवासी सुशील कुमार, भोपाल निवासी प्रभात त्यागी को रेमडेसिविर की अवैध तरीके से डील करते पकड़ा था। बाद में फार्मा कंपनी के डायरेक्टर गौरव चावला को गिरफ्तार कर तीन हजार रेमडेसिविर इंजेक्शन बरामद किया गया था। हालांकि, जिला अदालत के आदेश पर ऑपरेशन सेल ने रेमडेसिविर के कुछ सैंपल निकालकर बचे इंजेक्शन को चंडीगढ़ प्रशासन को सौंप दिया था, ताकि रेमडेसिविर खराब होने के बजाय किसी मरीज पर इस्तेमाल किया जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें