चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में और दुनिया में पहली बार 102 वर्षीय महिला मरीज की एंजियोप्लास्टी की गई है। फोर्टिस अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. एचके बाली ने महिला की एंजियोप्लास्टी की। डॉ. बाली का दावा है कि दुनिया में पहली बार इतनी उम्रदराज महिला की एंजियोप्लास्टी की गई है। डॉक्टर ने महिला को स्वस्थ बताया है।
उन्होंने कहा कि वह खुशहाल जिंदगी जी रही है। उनके मुताबिक चंडीगढ़ सेक्टर-48 की रहने वाली सावित्री देवी को अचानक सांस न आने की शिकायत के कारण अस्पताल लाया गया। उनकी हालत धीरे-धीरे बिगड़ गई और छाती में दर्द भी उठने लगा।
वह एक्यूट कोरेनरी सिंड्रोम से पीड़ित थी। हार्ट फेल होने के कारण उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। कोरोनरी एंजियोग्राम ने दिखाया कि उनके हृदय की मुख्य आर्टरी में 90 फीसदी ब्लॉकेज और साथ ही दाईं कोरेनरी आर्टरी भी 80 फीसदी तक ब्लॉक थी।
104 और 108 वर्षीय पुरुष मरीज करा चुके हैं एंजियोप्लास्टी
महिला की स्थिति के बारे में डॉ. बाली ने उनके परिजनों से बातचीत की और एंजियोप्लास्टी करने का फैसला लिया। एजिंयोप्लास्टी के बाद कई दिन तक सावित्री देवी को ऑब्जर्वेशन में रखा गया।
डॉ. बाली का कहना है कि सावित्री देवी की ही तरह नोएडा के 104 वर्षीय पुरुष और बंगलूरू के 108 वर्षीय पुरुष ने भी एंजियोप्लास्टी कराई थी। लेकिन 102 वर्षीय महिला की एंजियोप्लास्टी के केस का उल्लेख कहीं भी नहीं मिला।
डॉ. बाली ने कहा कि एडवांस्ड तकनीक और स्किल की बदौलत किसी भी उम्र में एंजियोप्लास्टी करना मुमकिन है। दुनिया भर में लोगों की बढ़ती उम्र सीमा के चलते बुजुर्ग लोगों में एंजियोप्लास्टी के केस की गिनती पिछले सालों में बढ़ गई है।
पिछले आठ सालों में डॉ. बाली और टीम ने मिलकर 80 से ज्यादा उम्र के 200 से भी अधिक मरीजों की सफल कोरेनरी एंजियोप्लास्टी की है।
इस मर्ज में काम आती है कोरोनेरी एंजियोप्लास्टी
कोरोनरी एंजियोप्लास्टी उन बुजुर्ग मरीजों में काम आती है, जिन्हें एक से ज्यादा मेडिकल प्रॉब्लम हो। जैसे रीनल फेल्योर व फेफड़ों की बीमारी सहित अन्य बीमारियां।
बुजुर्गों में एंजियोप्लास्टी इसलिए भी काम करती है क्योंकि प्रक्रिया को अक्सर कलाई (रेडियल आर्टरी) के रास्ते किया जाता है। जिससे सिर्फ एक दिन में मरीज घर लौट सकता है।