जिला अदालत में पहली बार हिंदी में याचिका दायर की गई है। हिंदू मैरिज एक्ट के एक मामले में एडवोकेट ने याचिका दायर की है। संभवत: यह पहली बार होगा जब किसी वकील ने हिंदी में याचिका दायर की है।
वहीं जिला अदालत की फाइलिंग ब्रांच ने हिंदी में याचिका को लेने से इंकार किया तो उन्होंने उन्हें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की रूलिंग का हवाला दिया। इसके मुताबिक हाईकोर्ट के अंतर्गत आने वाली सभी जिला अदालतों की आधिकारिक भाषा हिंदी, उर्दू और पंजाबी है। उनकी दलील के बाद इसे मंजूर कर लिया गया।
याचिका मौलीजागरां की एक महिला की ओर से पंचकूला निवासी पति के खिलाफ हिंदू मैरिज एक्ट के तहत दायर की गई है। इसमें उनका कहना है कि कि वह ससुराल वालों की क्रूरता का शिकार हुई है। इसके बावजूद वह अपना घर बसाने को तैयार है। उसके पति ने उससे अलग होने के लिए तलाक का केस दायर किया हुआ है। फिर भी वह अपने पति के साथ घर बसाना चाहती है।
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याची के अनुसार वर्ष 2014 में वर पक्ष उनके घर रिश्ता लाए और कहा कि उनके बेटे की पंचकूला सेक्टर-9 में दो दुकानें हैं। उन्होंने बडे़-बड़े वादे किए। इसके बाद दोनों पक्षों में बातचीत तय होने पर उनकी नवंबर 2015 में सगाई हुई।
दिसंबर 2015 में उनकी शादी हो गई। याची ने शादी के बाद बीएड करने की इच्छा जताई जिस पर प्रतिवादी पक्ष ने मुंहमांगा दहेज न मिलने की बात कहते हुए महिला को खरी खोटी सुनाई। इसी प्रकार याची ने जब पति को बाहर घूमने जाने (हनीमून) की बात कही तो भी याची को ताने मारे गए। याची ने ससुराल पक्ष द्वारा उसे ताने मारने का आरोप याचिका में लगाया है। इसके बाद याची महिला और उनका पति किराए पर रहने लगा।
याची ने अपने पति के एक युवती से संबंध होने का भी दावा किया है। याची के मुताबिक मई 2017 में उनके पति कुछ काम होने की बात बोल सूरत चले गए और इस बीच कोर्ट से एक समन आया जिसमें याची को पता चला कि उनके पति ने कोर्ट में तलाक का केस दायर किया है।
हाईकोर्ट के नियमों में हिंदी, उर्दू और पंजाबी है आधिकारिक भाषाएं
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हाईकोर्ट के नियमों में हिंदी, उर्दू और पंजाबी है आधिकारिक भाषाएं
एडवोकेट अजय कुमार शर्मा के अनुसार हाईकोर्ट रुल्स एंड आर्डर के चैप्टर एक की नोटिफिकेशन में हाईकोर्ट की अधीनस्थ अदालतों की भाषाओं में हिंदी, पंजाबी और उर्दू हैं। साथ ही कहा कि यदि किसी याचिकाकर्ता को अंग्रेजी नहीं आती है तो उसे कैसे पता चलेगा कि उसके वकील ने कोर्ट में क्या केस दायर किया है, तो इसका क्या फायदा।
एडवोकेट अजय के मुताबिक सीआरपीसी में प्रावधान है कि यदि कोई कोर्ट में अपने बयान हिंदी या पंजाबी में दर्ज करवाता है तो वह बयानों को इंग्लिश में ट्रांसलेट किए जाने से मना कर सकता है।