शुरुआती दौर में जंगी जहाज मिग-21
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बाद में वायु सेना मुख्यालय ने तय किया कि मिग-21 हिंडन में तैनात होगा। यह एक बिल्कुल नया हवाई अड्डा था जो अभी निर्माणाधीन था इसलिए छह माह तक मिग-21 के लिए एक अस्थायी अड्डे की तलाश शुरू की गई जो चंडीगढ़ पर खत्म हुई। उस वक्त चंडीगढ़ में रूस के विमान एएन-12, आईएल-14 और एमआई-4 संचालित थे। यहां मिग-21 केवल छह माह के लिए आए थे मगर उन्हें दो साल तक यहां तैनात रखा गया।
साल 2002 तक रहा चंडीगढ़ से जुड़ाव भारतीय वायुसेना की पहली मिग-21 स्क्वॉड्रन नंबर 28 का गठन चंडीगढ़ में किया गया था। इसके लिए छोटा हैंगर बनाया गया। जहां एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) के बाहर तीन तंबू लगाए गए। एक तंबू में उड़ान कार्यालय था। दूसरा डीएसएस के लिए और तीसरा तंबू अर्दली कक्ष बनाया गया। एटीसी के अंदर, एक कमरा उड़ान किट स्टोर और दूसरा चेंजिंग एरिया था। स्क्वॉड्रन समृद्ध होने लगी और विमानों व पायलटों की संख्या भी बढ़ती रही। चंडीगढ़ में 200 से ज्यादा पायलटों को मिग-21 के लिए तैनात किए गए। भले ही बाद में मिग-21 की स्क्वॉड्रन राजस्थान के नाल एयरफोर्स स्टेशन में शिफ्ट हो गई मगर चंडीगढ़ से मिग का जुड़ाव 2002 तक बना रहा। चंडीगढ़ स्थित एक स्क्वॉड्रन ने साल 1988 से 2002 तक एक संरक्षक के रूप में इन विमानों की निगरानी करती रही। यही वजह है कि मिग-21 के लिए चंडीगढ़ केवल एक बेस से कहीं अधिक रहा।