चंडीगढ़। यूटी प्रशासन की ओर से हाल ही में गठित नई एडवाइजरी काउंसिल की पहली बैठक मंगलवार को होगी। इसकी अध्यक्षता पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया करेंगे। हालांकि, सांसद मनीष तिवारी शामिल नहीं होंगे। वह संसद के चल रहे सत्र में होंगे। एक ट्वीट के माध्यम से बताया है कि उन्होंने बैठक की तारीख बदलने की मांग की थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। तिवारी ने यह भी कहा कि अगस्त 2024 से फरवरी 2025 तक दुर्भाग्य से कुछ नहीं हुआ है।
बैठक में शहर से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी, जिनमें प्रमुख रूप से मेट्रो प्रोजेक्ट और डंपिंग ग्राउंड से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं। 14 सितंबर 2024 को आयोजित पिछली बैठक में चंडीगढ़ में विधानसभा बनाने, लाल डोरे को खत्म करने, नीड बेस्ड चेंज, भिखारी समस्या और बढ़ रहे ई-रिक्शा की संख्या जैसे विभिन्न मुद्दों पर सदस्यों ने अपनी राय रखी थी। प्रशासन ने इस बार बैठक में मेट्रो प्रोजेक्ट की प्रगति, डंपिंग ग्राउंड की स्थिति और शहर के समग्र विकास को लेकर विभिन्न योजनाओं पर विस्तार से चर्चा करने की योजना बनाई है। चंडीगढ़ में मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर लंबे समय से चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन इसे लेकर कोई ठोस कदम अब तक नहीं उठाया गया है। शहर के कचरा निस्तारण को लेकर भी नगर निगम को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पहले एडवाइजरी काउंसिल में 57 सदस्य थे, जिनकी वर्ष 2023 में संख्या बढ़ाकर 59 कर दी गई थी लेकिन अब फिर संख्या को 54 किया गया है। प्रशासक को हर छह महीने में काउंसिल की एक बैठक बुलानी होती है, जिसमें शहर के लगभग सभी मुद्दों पर चर्चा की जाती है और समस्याओं का समाधान ढूंढा जाता है।