कोरोना की वजह से प्रशासक की यह महत्वाकांक्षी योजना लटक गई लेकिन अब फिर से इसे रफ्तार दी जा रही है। बदनौर की योजना के अनुसार इसके लिए बीते दिनों एक कमेटी भी बनाई गई, जिसमें चंडीगढ़ के कई मशहूर लोगों को शामिल किया गया था। उस कमेटी ने प्रशासन के सामने मेमोरियल को चलाने का प्रस्ताव रखा है। चूंकि, बेअंत सिंह मेमोरियल सरकारी जमीन पर बना है और भवन को बनाने में भी सरकारी पैसा खर्च किया गया है, इसलिए प्रशासक की तरफ से बनाई गई कार्यवाही समिति को इस पूरे मामले को अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गई थी। कार्यवाही समिति के अध्ययन के बाद यह मुद्दा गवर्निंग काउंसिल में जाएगा, जहां आखिरी फैसला लिया जाएगा।
मीडिया सेंटर को कैफेटेरिया में बदला जा रहा, जून 2021 में पूरा होगा काम
सेक्टर-42 का बेअंत सिंह मेमोरियल 12 एकड़ जमीन पर बना है। यहां पर एक बड़ी लाइब्रेरी, भवन, ओपन एयर थियेटर है। इसके अलावा यहां एक मीडिया सेंटर था, जिसे अब कैफेटेरिया के रूप में बदला जा रहा है, इसका काम जून 2021 में खत्म होगा। यहां नौ एकड़ जमीन पर मॉडर्न कल्चरल हब विकसित किया जाना है। इस जमीन पर कल्चर को और विस्तार दिया जाएगा।
मौजूदा मेमोरियल स्ट्रक्चर, समाधि स्थल और लैंडस्केपिंग एरिया को बेहतर बनाया जाएगा। सेंटर में कॉन्फ्रेंस, वर्कशॉप, कल्चरल प्रेजेंटेशन, फूड प्वाइंट और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं होंगी। गौरतलब है कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की याद में यह मेमोरियल बनाया गया था। बता दें कि कार में बम लगाकर बेअंत सिंह की हत्या कर दी गई थी। बेअंत सिंह साल 1992 से 1995 तक पंजाब के मुख्यमंत्री रहे थे।