चंडीगढ़ का पहला मैटीरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर (एमआरएफ) शुक्रवार को शुरू हो गया। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने इसका उद्घाटन किया। यहां लगभग 150 गाड़ियां कचरा लेकर जाएंगी। माह के अंत तक इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एमआरएफ शुरू हो जाएगा। वहीं जुलाई में डड्डूमाजरा स्थित एमआरएफ को तैयार करने का लक्ष्य है।
निगम आयुक्त केके यादव ने बताया कि घर-घर से कचरा उठाने वाली गाड़ियां तीन एमआरएफ पर कचरा लेकर जाएंगी। इन तीन हिस्सों को छह जोन में बांटा गया है। तीनों एमआरएफ में 150 से 200 गाड़ियां कचरा लेकर जाएंगी। अभी तक यह गाड़ियां सीधे डंपिग ग्राउंड या कचरा निस्तारण प्लांट में जाती हैं। इस दौरान वहां गाड़ियों की लंबी कतार लग जाती है। इसके अलावा कचरे की दुर्गंध के साथ धूल भी उड़ती जाती है। एमआरएफ बनने के बाद वाहनों को पूरे शहर का चक्कर नहीं जाना पड़ेगा। इससे ईंधन भी बचेगा। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत बनाए गए इस प्रोजेक्ट पर लगभग 32 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
घर-घर से कचरा उठाने वाले कर्मचारी होंगे तैनात
तीनों एमआरएफ बनने के बाद गाड़ियों की जोन के हिसाब से सूची तैयार होगी। एमआरएफ के नजदीक वाले क्षेत्रों की गाड़ियां वहां जाकर कचरा डालेंगी। वहीं घर-घर से कचरा उठाने वाले जो कर्मचारी गाड़ियों पर नहीं लग पाए हैं, उन्हें एमआरएफ में लगाया जाएगा। जो कचरा अलग-अलग करने का काम करेंगे।
स्काडा में पता चल जाएगा गाड़ियों की कार्यक्षमता
जुलाई तक स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत स्काडा सिस्टम भी शुरू हो जाएगा। इसमें गाड़ियों की लोकेशन के साथ ही कितना कचरा उठा, यह भी पता चल जाएगा। किसी क्षेत्र में कोई गाड़ी नहीं पहुंची तो स्काडा सिस्टम पर तत्काल पता चल जाएगा और उसकी जगह दूसरी गाड़ी को भेजा जाएगा। पेट्रोल के लिए निगम ने गाड़ियों के टैंक पर पहले ही चिप लगा दी है। इससे कर्मचारियों की कार्यक्षमता भी बढ़ जाएगी।