चंडीगढ़। हरियाणा के प्रथम व द्वितीय श्रेणी के मजिस्ट्रेट अब अपराधिक केसों में पांच लाख रुपये तक जुर्माना लगा सकेंगे। इसके लिए हरियाणा सरकार विधानसभा सत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (हरियाणा संशोधन) विधेयक पेश करने जा रही है।
वर्तमान में प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट केसों में अधिकतम तीन वर्ष तक के लिए कारावास या अधिकतम पचास हजार रुपये जुर्माना या फिर दोनों की सजा सुना सकते हैं। अब जुर्माना की राशि को दस गुना तक बढ़ाया गया है। वहीं, द्वितीय श्रेणी के मजिस्ट्रेट के पास वर्तमान में अधिकतम एक वर्ष तक कारावास और अधिकतम दस हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजा सुनाने की शक्ति है। वे एक लाख रुपये तक जुर्माना लगा सकेंगे। अधिकारियों ने बताया कि चेक बाउंस मामले में जुर्माने की राशि अधिक हो सकती है, लेकिन मजिस्ट्रेट के पास शक्ति नहीं होती। इससे जुर्माने लगाने का उद्देश्य प्राप्त नहीं किया जा सकता है। इसी कारण सरकार संशोधन करने जा रही है।
हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि बिल के तहत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 23 की उपधारा (2) और उपधारा (3) में संशोधन किए जाने का प्रस्ताव किया गया है। इससे, हरियाणा के सभी 22 जिलों और प्रदेश के करीब तीन दर्जन उप-मंडलों में प्रथम व द्वितीय श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की शक्ति में दस गुना बढ़ोतरी हो जाएगी। सत्र में बिल पारित होने के बाद केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के जरिये इसे राष्ट्रपति भवन भेजा जाएगा। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस पर मुहर लगाएंगी।