दिवाली पर आतिशबाजी की चपेट में आने से आठ लोगों की एक-एक आंख की रोशनी चली गई। दिवाली की रात आतिशबाजी से प्रभावित 122 लोग शहर के अस्पतालों में पहुंचे। इनमें किसी की आंख में चोट लगी थी तो किसी का हाथ जल गया था।
45 लोग आंख जख्मी होने पर पीजीआई पहुंचे। इनमें से 18 की रात को ही सर्जरी करनी पड़ी। इनमें आठ केस ऐसे थे जो जिनकी एक आंख की रोशनी चली गई।
घायलों में 22 बच्चे शामिल थे। मरीजों में ज्यादातर पंजाब और हरियाणा से थे। ट्राईसिटी के 15 मरीज पीजीआई पहुंचे। जीएमसीएच-32 में 25 मरीज पहुंचे। इनमें 10 केस आग से झुलसने वाले थे और 15 की आंख जख्मी हो चुकी थी।
दो मरीज अभी अस्पताल में भर्ती हैं जबकि अन्य को छुट्टी दे दी गई। सेक्टर-16 के अस्पताल में आतिशबाजी से प्रभावित 52 लोग पहुंचे। इनमें 34 झुलसने वाले और 18 आई इंजरी के केस थे।
डॉक्टरों ने दी चौबीस घंटे ड्यूटी
दिवाली पर सिटी के अस्पतालों में डॉक्टर चौबीस घंटे ड्यूटी पर रहे। पीजीआई के एक डाक्टर ने कहा कि मरीज दीपावली की रात को ही आना शुरू हो गए थे।
आखिरी पटाखा आंख में लगा
कैथल का पांच वर्षीय शुभम दीपावली के दिन काफी खुश था।
आखिरी पटाखा चलाते समय नर्सरी में पढ़ने वाले शुभम को आंख में गहरी चोट लग गई। दीपावली की रात दो बजे पीजीआई में उसका आपरेशन हुआ।
शुभम का मां के अनुसार शाम करीब 7:30 बजे जब वह आखिरी पटाखा बजा रहा था तो उसे भागने को जगह नहीं मिली। इससे पटाखा उसकी आंख में जा लगा।
दीवाली से पहले ही घायल
सरदूलगढ़ मानसा निवासी नौ वर्षीय विशाल कुमार को दीवाली से एक दिन पहले ही पटाखों ने जला डाला। उनके पिता रवि कुमार ने कहा कि दीवाली से एक दिन पहले बुलेट बम चलाते समय पटाखे का टुकड़ा उसकी आंख में जा लगा। उसे पीजीआई लाया गया। दीवाली के दिन उसका आपरेशन हुआ। धुरी के नौ वर्षीय मनीष को भी पटाखा चलाते वक्त आंख में गहरी चोट लगी।