सेक्टर-34 में ज्यादातर कोचिंग संस्थान दूसरे, तीसरे व चौथे फ्लोर पर चल रहे हैं। इन कोचिंग संस्थानों में जाने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता है। सीढ़ियां इतनी संकरी हैं कि दो व्यक्ति से ज्यादा लोग एक साथ चढ़ या उतर नहीं सकते। ऐसे में यदि कोई हादसा होता है तो छात्र-छात्राओं समेत वहां मौजूद अन्य लोगों के पास बाहर निकलने का कोई विकल्प सामने नहीं होगा।
वैसे तो आगजनी के दौरान लिफ्ट का प्रयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए। यदि प्रयोग करने का प्रयास किया भी जाए तो लिफ्ट इतनी छोटी है कि चार से ज्यादा लोग लिफ्ट में भी नहीं आ सकते।
होर्डिंग और जालियों से से पूरी तरह बंद हैं फर्स्ट फ्लोर
सभी बिल्डिगों के प्रथम तल (फर्स्ट फ्लोर) को कोचिंग संचालकों और ऑफिस संचालकों ने पूरी तरह से पोस्टर व बैनर से ढंक दिया है। यदि लोग आपात स्थिति में प्रथम तल से नीचे सीढ़ी लगाकर उतरने या कूदने का प्रयास करें तो संभव नहीं। वहीं ज्यादातर लोगों ने बंदरों और अन्य कारणों से जालियां लगवा ली हैं। ऐसे में हादसे के दौरान लोगों के लिए वैकल्पिक मार्ग पूरी तरह से बंद नजर आए।
लटकते तार, कभी भी हो सकते हैं हादसे का कारण
बिल्डिगों से लटकते तार हमेशा यहां हादसों को दावत देते रहते हैं। सेक्टर-34 की ज्यादातर बिल्डिगों के चारों और बिजली और अन्य तार लटक रहे हैं। गर्मियों के समय सभी संस्थानों और ऑफिसों में एसी चल रहे हैं। रहे थे ऐसे में हीट के कारण आग लगने का खतरा रहता है। सुरक्षा के लिहाज से यह काफी गंभीर स्थिति है। बावजूद इसके कोई इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
चारों ओर गाड़ियां, सड़क पर भी कब्जा
सेक्टर में पार्किंग स्थल तो है लेकिन यहां चारों तरफ वाहनों के खड़ा होने के कारण पैदल चलने वाले लोगों के लिए बमुश्किल जगह बची है। वहीं दुकानदारों ने भी बाहर तक अतिक्रमण कर रखा है। न कोई रोकने वाला है और न कोई पूछने वाला। यदि कोई हादसा होता और भगदड़ मच जाती है तो सुरक्षित निकल पाना संभव नहीं होगा। नीचे सड़क पर व बिल्डिगों के नीचे होटल व ठेले वाले खड़े रहते हैं।
नगर निगम ने पिछले वित्तीय वर्ष में 31 कोचिंग संचालकों को नोटिस दिया था। उसके बाद कोई नोटिस का स्टेटस चेक नहीं किया। ऐसे में सवाल उठता है कि नगर निगम व फायर ब्रिगेड विभाग समय-समय में चेकिंग क्यों नहीं करते? यदि करते हैं और नोटिस देते हैं तो उसका स्टेटस क्यों नहीं चेक करते? क्या विभाग चंडीगढ़ में भी सूरत जैसे हादसे का इंतजार कर रहा है। इतने बड़े हादसे के बाद शनिवार को भी विभाग ने न तो शहर में चेकिंग की और न दिए गए नोटिस का स्टेटस जानने की जहमत उठाई।
एसएसपी को सौंपा पत्र, ठोस कदम उठाने की मांग
सूरत में हुए हादसे के बाद शनिवार को सेक्टर-45 स्थित उत्थान एजुकेशनल एंड कल्चरल एक्टिविटीज सोसायटी के सदस्य शिशुपाल ने चंडीगढ़ की एसएसपी नीलांबरी विजय जगदले को एक पत्र सौंपा है।
पत्र में उन्होंने कहा है कि शहर के कई स्थानों पर शिक्षण संस्थान चल रहे हैं लेकिन सुरक्षा के मानक कहीं भी पूरे नहीं किए गए हैं। ऐसे में बच्चों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। इस संबंध में जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो सूरत जैसा हादसा यहां भी हो सकता है।
सेक्टर-34 के आंकड़े
कुल इंस्टीट्यूट - 150 से ज्यादा
दुकानें - 70 से ज्यादा
ऑफिस - 50 से ज्यादा
आग के दौरान सुरक्षा के उपाय
1. आग लगने पर लिफ्ट का उपयोग न करें, केवल सीढ़ियों का ही प्रयोग करें।
2. धुएं से घिरे होने पर अपने नाक और मुंह को गीले कपडे़ से ढंक लें।
3. अगर आप धुएं से भरे कमरे में फंस जाएं और बाहर निकलने का रास्ता न हो तो दरवाजे को बंद कर लें और सभी दरारों और सुराखों को गीले तौलिए या चादरों से सील कर दें, जिससे धुआं अंदर न आ सके।
4. अपने संस्थान व ऑफिस में चेक करें कि स्मोक (धुआं) डिटेक्टर लगा है कि नहीं।
5. निश्चित अंतराल पर इमारत में लगे फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर, पानी के स्रोत, फाया सेफ्टी यंत्रों की जांच करवाएं।
6. अपने आसपास लगे अग्निशमक की तारीख जांच लें।
7. अग्निशमक यंत्र का प्रयोग कब और कैसे करना है, इस बारे में अवश्य जानें
8. यदि आपके कपड़ों में आग लग जाए तो भागे नहीं, जमीन पर लेट जाएं और उलट-पलट (रोल) करें।
9. भारी धुआं और जहरीली गैस सबसे पहले छत की तरफ इकट्ठा होती है, इसलिए अगर धुआं हो तो जमीन पर झुक कर बैठें।
10. आग लगने के समय यदि इमरजेंसी दरवाजा है तो नीचे की ओर भागें।