सोमवार की रात करीब 8.30 बजे अस्पताल में सब कुछ सामान्य था। अचानक भूतल पर स्थित ऑपरेशन थियेरटर में शार्ट सर्किट होने से धुआं उठा। कुछ ही देर में स्टाफ सदस्य कुछ समझ पाते अचानक यह धुआं बढ़ता चला गया। ऐसे में आग की सूचना से मरीजों, तीमारदारों समेत सभी में हड़कंप मच गया। एक दम सभी बाहर निकले।
इससे दाखिल मरीजों की सांसें अटक गई। धीरे-धीरे पूरे अस्पताल में यह धुआं फैलने लगा और आग बढ़ने लगी। आग की सूचना से अस्पताल में बचाओ - बचाओ की आवाजें गूंजने लगा। पुलिस और प्रशासन को सूचना दी गई।
करीब आधे घंटे तक चले इस ऑपरेशन पर पुलिस, फायर ब्रिगेड कर्मचारियों की मदद से अस्पताल में दाखिल मरीजों को बाहर निकाला गया और एंबुलेंस की मदद से उन्हें कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज और सिविल अस्पताल में दाखिल कराया गया। इस दौरान सिटी थाना प्रभारी हरजिंद्र सिंह समेत भारी पुलिस बल अस्पताल के बाहर तैनात रहा।
डायरेक्टर ने किया इमरजेंसी का मुआयना
वहीं, रात दस बजे मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर सुरेंद्र कश्यप, चिकित्सा अधीक्षक डॉ जगदीश दुरेजा, इमरजेंसी के इंचार्ज डॉ गुंजन चौधरी इमरजेंसी में पहुंचे और दाखिल किए गए मरीजों का हाल जाना। साथ ही स्टाफ और डॉक्टरों को निर्देश दिए कि इलाज में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इनमें से तीन को आईसीयू में दाखिल किया गया है। इनमें लाल चंद, सतनाम और सेतिया राम शामिल हैं। इसके अलावा, अन्य को इमरजेंसी में दाखिल कराया गया है। डायरेक्टर ने बताया कि मरीजों को देखने के लिए संबंधित विभागों के एचओडी को बोल दिया गया है। सभी विभाग अपने काम में लग गए हैं। सभी मरीजों का प्रॉपर तरीके से इलाज किया जाएगा। सूचना मिलते ही स्टाफ को अलर्ट कर दिया गया था।
अचानक छाए धुएं से सब घबराए
लीवर की दिक्कत के कारण सिग्नेस अस्पताल में दाखिल प्रभजीत सिंह ने बताया कि वह आईसीयू में था, अचानक धुआं हुआ और आग की सूचना मिली तो सभी में भगदड़ मच गई। इसके बाद पुलिस और फायर ब्रिगेड कर्मचारियों की मदद से मरीजों को बाहर निकाला गया।
माडल टाउन निवासी रामकुमार को निमोनिया की दिक्कत के कारण सिग्नेस अस्पताल में दाखिल कराया था। आग के बाद उसे कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट किया गया लेकिन परिजनों ने उसे कॉलेज में दाखिल न कराकर दूसरे निजी अस्पताल में ले गए।
अस्पताल के बाहर जमा हुई भीड़, रेलवे रोड रहा जाम
संजीव बंसल सिग्नेस अस्पताल में आग की सूचना और बजते हूटरों की आवाजें सुनकर आसपास के लोग अपने घरों से बाहर निकले और हालात जानने की कोशिश की। वहीं काफी संख्या में लोग घरों की छतों पर चढ़ गए। इस दौरान, अस्पताल के बाहर भी काफी संख्या में लोग जमा हो गए थे। इससे रेलवे रोड पर जाम की स्थिति रही। करीब एक घंटे तक रेलवे रोड पर वाहनों का आवागमन बंद रहा।
जैसे की अस्पताल में आग की खबर शहर में फैली तो मरीजों को रिश्तेदार अस्पताल में दौड़ते हुए पहुंचे। उन्होंने अपने मरीजों को वहां पहचाना। कुछ लोग को अपने मरीजों को घर ले गए तो कुछ दूसरे प्राइवेट अस्पताल में ले गए। सभी डरे हुए थे। रामदयाल ने बताया कि उसका रिश्तेदार अस्पताल में दाखिल था, जैसे ही उसने आग की सूचना मिली तो वे वापस अस्पताल पहुंचे।
मरीजों को बचाने में डॉ रुपेश हुए चोटिल
सिग्नेस अस्पताल में तैनात डॉ रुपेश कुमार मरीजों को बाहर निकालते समय चोटिल हो गए। अंधेरा होने के कारण उनको हाथ और पैरों पर चोट आई हैं। डॉ रुपेश ने बताया कि आग के कारण मरीजों को निकालते समय उनके हाथ और पैरों पर चोट आई है। लेकिन शुक्र है कि सभी मरीज सुरक्षित निकाल लिए गए।
आग शार्ट सर्किट के कारण लगी है। समय रहते पुलिस और प्रशासन की तरफ से मिली मदद के कारण सभी मरीजों को सुरक्षित निकाल लिया गया और मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट भी कर दिया गया। रात को ही अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ मेडिकल कॉलेज में पहुंच गए हैं और संबंधित मरीजों को चेक कर रहे हैं। आग से अस्पताल के नुकसान का आंकलन किया जा रहा है।-आकर्षण कुमार, प्रवक्ता, सिग्नेस अस्पताल।