उपरोक्त सभी हिदायतों के लिए सरकार की वित्त विभाग द्वारा अलग-अलग नोटिस जारी किए गए हैं। एक नोटिस के तहत सभी विभागों से कहा गया है कि वे जो भी खर्च कर रहे हैं, उसके मुकाबले रसीद कम जेनरेट की जा रही है। ऐसे खर्च का पूरा हिसाब रखने के लिए अब विभागों से कहा गया है कि वे प्रत्येक तीन माह पर खर्च की रसीदें सरकारी खजाने में जमा कराएं।
चूंकि विभागों के खर्च की सीमा पहले से तय की जाती है, इसलिए तीन माह की रसीदों से यह पता चल सकेगा कि कौन से विभाग सीमा से अधिक खर्च कर रहे हैं। एक अन्य नोटिस के तहत, दफ्तरों के लिए फर्नीचर व अन्य साजो-सामान खरीदने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। हालांकि नए स्थापित होने वाले दफ्तरों के लिए प्रबंधकीय विभाग की अनुमति से इस मद में एक लाख रुपये तक का खर्च किया जा सकेगा जबकि इससे भी ज्यादा खर्च की अनुमति संबंधित मंत्री की मंजूरी के बाद वित्त विभाग की मंजूरी जरूरी होगी।
सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के मोबाइल बिल के भुगतान, आवास पर लगे लैंडलाइन फोन और इंटरनेट सुविधा पर भी सरकार द्वारा गत 24 नवंबर को लिए फैसले को लागू कर दिया गया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि कई विभागों द्वारा सरकारी खजाने से फंड निकालकर अपने बैंकों में रख लिया जाता है और 31 मार्च को फंड अगले साल खर्च करने के लिए मंजूरी दिए जाने की मांग की जाती है या 31 मार्च को यह रकम ब्याज सहित खजाने में जमा करवा दी जाती है।
वहीं सरकार को खजाने में से फंड रिलीज करने के उद्देश्य से लिए जा रहे कर्ज पर अधिक ब्याज देना पड़ता है। राज्य सरकार ने अब फैसला लिया है कि अगर किसी भी विभाग ने खजाने से फंड रिलीज करवाकर बिना किसी जस्टीफिकेशन के बैंकों में रखा हुआ है तो वे यह सारा फंड खजाने में जमा कराएं।