हरियाणा की वित्तीय स्थिति को पटरी पर लाने के लिए सरकार के सामने फिलहाल कर्ज लेने का ही विकल्प है। सरकार को विभिन्न कर से 6200 करोड़ रुपये आने की उम्मीद थी, जिसमें से अब मात्र 1600 करोड़ रुपये आने का अनुमान है। इसलिए सरकार को व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने के लिए 4600 करोड़ का प्रबंध करना पड़ेगा।
सीएम मनोहर लाल ने कहा है कि कोरोना के कारण आर्थिक स्थिति बिगड़ी है। अगर केंद्र सरकार से विशेष पैकेज मिलता है तो ठीक नहीं तो कर्ज लेना पड़ेगा। जीएसटी के 2500 करोड़ आने थे, अब 1000 करोड़ रुपये आने का अनुमान है। स्टांप ड्यूटी से 600 की बजाय अब न के बराबर आएगा, चूंकि जमीनों की खरीद फरोख्त रुक चुकी है।
आबकारी ड्यूटी से 1000 करोड़ की जगह 100 करोड़ आने का अनुमान है। वैट के 782 करोड़ में से 100 करोड़ के लगभग ही आएंगे। अन्य टैक्स से भी करोड़ों रुपये आने थे, जिन पर ब्रेक लग गया है। 1800 करोड़ कर्मचारियों के वेतन व 600 करोड़ से अधिक सामाजिक पेंशन को जाने ही हैं।
कर्मचारियों की पेंशन अलग है। 10 करोड़ रुपये सरकार ने कोरोना के मद्देनजर एक्सग्रेसिया के लिए रिजर्व किए हैं। बिजली उपभोक्ताओं को फिक्स चार्ज में छूट देने से सरकार पर 30 करोड़ का वित्तीय बोझ पड़ेगा। दिव्यांग व वरिष्ठ नागरिकों के लिए 1000 करोड़ रुपये रखे हैं। उन्होंने जनता से वित्तीय संकट में सरकार के सहयोग की अपील की है।
आढ़तियों से मार्मिक अपील- पैसे नहीं प्रदेश की चिंता करें
सीएम मनोहर लाल ने मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे आढ़तियों से मार्मिक अपील की हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मांग वित्तीय संकट के कारण अभी पूरी नहीं की जा सकती लेकिन उचित समय पर मान ली जाएगी। वह पैसे की जगह समाज व प्रदेश की चिंता करें।
इस समय ऐसे आढ़ती चाहिए जो कहें कि पैसा न भी मिले न सही, सरकार की सहायता करेंगे। उन्होंने कहा कि आढ़ती विपदा के समय कोई गलती न करें सरकार के नियमों को मानें व सहयोग दें। अभी हम रुके हैं, समय नहीं रुका। इस समय से पार पा लेंगे और अच्छा समय जल्दी आएगा। सीएम ने बताया कि सैकड़ों किसानों ने मंडियों में सरकार को सरसों दान की है। 56 किसान एक ही मंडी के हैं।