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Budget 2017: कैप्टन अभिमन्यु ने पेश किया हरियाणा का वित्त बजट, खास बातों पर एक नजर

Mon, 06 Mar 2017 01:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा का वित्त बजट 2017
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वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने सोमवार को 2017-18 के लिए बजट पेश किया। यह हरियाणा सरकार का तीसरा बजट है। इस बार 102329.35 करोड़ रुपए का बजट पेश किया। बजट ग्रामीण विकास पर आधारित है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा राज्य के सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों में की गई घोषणाओं को पूरा करने के लिए पैसे का इंतजाम भी बजट इसमें है।
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22393.51 करोड़ रुपए का पूंजीगत और 79935.84 करोड़ रुपये का राजस्व खर्च होगा। न ही कोई नया कर लगाया गया और न ही वैट दरों में कोई बदलाव किया गया। सौर ऊर्जा परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाले सोलर उपकरणों और कलपुर्जों को वैट से छूट दी गई है।  2016-17 के मुकाबले इस बजट में 13.18 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

वितमंत्री ने बताया कि पहली बार बजट ने एक लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया है। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में राजकोषीय घाटा कम हुआ है। प्रदेश में विकास कार्यों के लिए 14,932 करोड़ रुपए खर्च होंगे। सभी आर्थिक और राजकोषीय मानकों में प्रगति हुई है। प्रति व्यक्ति आय 5.9 की दर से बढ़ने की उम्मीद है।
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बजट 2017 की खास बातें

हरियाणा का वित्त बजट 2017
पहली बार व्यय के योजना एवं गैर-योजनागत वर्गीकरण को समाप्त करके बजट को राजस्व एवं पूंजीगत वर्गीकरण के रूप में प्रस्तुत किया गया। सकल राज्य घरेलू उत्पाद ने स्थिर मूल्यों (2011-12) पर वर्ष 14-15 के 5.7 प्रतिशत की तुलना में 2015-16 में 9.0 प्रतिशत की उच्च वृद्धि दर्ज की वर्ष 2016-17 में भी सकल राज्य घरेलू उत्पाद 8.7 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है और वर्ष 2017-18 में यह 9.0 प्रतिशत से अधिक रहने की संभावना है।

पिछली सरकार के गत पांच वर्ष के कार्यकाल के दौरान जीएसडीपी विकास दर कभी भी 9.0 प्रतिशत तक नहीं पहुंच पाई। यह वर्ष 2010-11 में 7.4 प्रतिशत, 2011-12 में 8.0 प्रतिशत, 2012-13 में 7.7 प्रतिशत, 2013-14 में 8.2 प्रतिशत और 2014-15 में 5.7 प्रतिशत तक कम हो गई थी। वर्ष 2014-15 में प्रति व्यक्ति आय की विकास दर 5.8 प्रतिशत के अखिल भारतीय आंकड़े की तुलना में 4.0 प्रतिशत थी।

प्रति व्यक्ति आय की विकास दर वर्ष 2015-16 में 6.6 प्रतिशत के अखिल भारतीय आंकड़े की तुलना में 7.5 प्रतिशत हो गई। वर्ष 2016-17 में प्रति व्यक्ति आय की विकास दर 7.2 प्रतिशत रहने की संभावना है, जबकि अखिल भारतीय प्रति व्यक्ति आय 5.9 प्रतिशत की दर से बढऩे की उम्मीद है।

हरियाणा बजट की और खास बातें

हरियाणा विधानसभा बजट सेशन 2017
प्राथमिक क्षेत्र (कृषि और सम्बद्ध क्षेत्र) ने वर्ष 2014-15 में 2 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि की तुलना में वर्ष 2015-16 में 3.2 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है। इसके 7.0 प्रतिशत की दर से बढऩे का अनुमान है। द्वितीयक क्षेत्र (उद्योग) ने वर्ष 2015-16 में 7.7 प्रतिशत की ठोस वृद्धि दर्ज की है, जबकि वर्ष 2014-15 में यह मात्र 2.3 प्रतिशत थी।

वर्ष 2016-17 में इस क्षेत्र की विकास दर 6.1 प्रतिशत अनुमानित है। तृतीयक (सेवा) क्षेत्र ने वर्ष 2015-16 में 10.9 प्रतिशत की आकर्षक विकास दर दर्शायी है, जबकि वर्ष 2014-15 में यह 10.3 प्रतिशत थी। वर्ष 2016-17 में इस क्षेत्र की विकास दर 10.8 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी वर्ष 2014-15 में 49.6 प्रतिशत से बढक़र वर्ष 2015-16 में 50.7 प्रतिशत और वर्ष 2016-17 में 51.7 प्रतिशत हुई है।

द्वितीयक क्षेत्र की हिस्सेदारी गत तीन वर्षों के दौरान लगातार कमोबेश 30 से 31 प्रतिशत के बीच रही। प्राथमिक क्षेत्र की हिस्सेदारी में गिरावट का रुख रहा, जो वर्ष 2014-15 में 19.3 प्रतिशत के मुकाबले वर्ष 2015-16 में 18.3 प्रतिशत और 2016-17 में 18.1 प्रतिशत रही।
 

बजट में ये सब भी रहा खास

राज्यपाल के अभिभाषण के साथ बजट सत्र का आगाज - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2014-15 में राजस्व घाटा, जोकि सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 1.90 प्रतिशत था, वर्ष 2015-16 में कम होकर 1.60 प्रतिशत हो गया और वर्ष 2016-17 में इसके 1.33 प्रतिशत रहने की संभावना है। वित्त वर्ष 2017-18 के लिए, इसे एक प्रतिशत से भी कम करने का लक्ष्य रखा है और वर्ष 2019-20 के अंत तक इसे  शून्य पर लाने का लक्ष्य है।

राजकोषीय घाटा 14वें वित्त आयोग द्वारा राज्यों के लिए निर्धारित की गई सकल राज्य घरेलू उत्पाद के 3 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के अंदर रहा। वर्ष 2015-16 में, राज्य का राजकोषीय घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 2.92 प्रतिशत था, जबकि वर्ष 2016-17 में इसके सकल राज्य घरेलू उत्पाद के 2.49 प्रतिशत तक रहने की संभावना है। आगामी वर्ष के दौरान, इसके सकल राज्य घरेलू उत्पाद के 2.61 (उदय के बिना) से 2.84 प्रतिशत (उदय के साथ) के बीच रहने की संभावना है।

सकल राज्य घरेलू उत्पाद अनुपात पर ऋण 25 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के अंदर रहा। यह ‘उदय’ के बिना वर्ष 2014-15 में 16.21 प्रतिशत, वर्ष 2015-16 में 17.40 प्रतिशत और वर्ष 2016-17 (संशोधित अनुमान) में 18.08 प्रतिशत तथा ‘उदय’ के साथ वर्ष 2015-16 में 20.96 प्रतिशत और वर्ष 2016-17 (संशोधित अनुमान) में 22.82 प्रतिशत रहा। वर्ष 2017-18 में ‘उदय’ के बिना 18.74 प्रतिशत और ‘उदय’ के साथ 22.93 प्रतिशत रहने की संभावना है।
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कुछ और खास बातें बजट की

हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र - फोटो : अमर उजाला
राज्य घरेलू उत्पाद के अनुपात के रूप में कुल राजस्व प्राप्तियां वर्ष 2016-17 में 11.02 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि वर्ष 2015-16 में ये 9.80 प्रतिशत और वर्ष 2014-15 में 9.33 प्रतिशत थी। यह एक अति महत्वपूर्ण उपलब्धि है जिसका राज्य संसाधनों पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है।

वर्ष 2017-18 के बजट अनुमानों में 68810.88 करोड़ रुपये की कुल राजस्व प्राप्तियां प्रस्तावित की गई हैं, जिनमें 51711.52 करोड़ रुपये की कर प्राप्तियां और 17099.36 करोड़ रुपये का गैर-कर प्राप्तियां शामिल हैं। यह वर्ष 2016-17 की तुलना में वर्ष 2017-18 में कुल राजस्व प्राप्तियों में 14.06 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

वर्ष 2017-18 में, कुल राजस्व प्राप्तियां, सकल राज्य घरेलू उत्पाद के 11.12 प्रतिशत रहने की संभावना है। कुल राजस्व प्राप्ति अनुपात पर ब्याज भुगतान वर्ष 2014-15 में 16.98 प्रतिशत था, जो वर्ष 2015-16 में बढक़र 17.42 प्रतिशत हो गया। हालांकि, वर्ष 2016-17 में यह घटकर 15.94 प्रतिशत रह गया है। वर्ष 2017-18 में इसके लगभग 16.36 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

वर्ष 2015-16 के 6780.12 करोड़ रुपये के कुल पूंजीगत खर्च के समक्ष, संशोधित अनुमान 2016-17 में 9.6 प्रतिशत बढक़र यह 7432 करोड़ रुपये हो गया। आगामी वित्त वर्ष 2017-18 के लिए, इसे संशोधित अनुमान 2016-17 पर दोगुना करके 14932 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव किया गया है।
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