जिले में अपनी उम्र क्रॉस कर चुके पंद्रह हजार बूढ़े पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलनी शुरू हो गई है। वन विभाग ने लिस्ट बना ली है और यह पेड़ अलग-अलग जगहों पर हैं। इसके लिए विकास (सड़क चौड़ी) के नाम पर भी हरेभरे वृक्षों को लगातार काटा जा रहा है।
इसकी पूर्ति के लिए वन विभाग पौधे लगाने का अभियान तो चलाता है, लेकिन हरियाली को बढ़ावा नहीं मिल रहा है, जो आगामी दस से पंद्रह वर्षों के बाद स्थिति विकट होनी तय है। पर्यावरण विशेषज्ञ बताते हैं कि हरियाली नहीं रहेगी तो हवा में अशुद्धता बढ़ेगी और हमारे स्वास्थ्य पर बीमारियां अटैक करेंगी।
जिले में छह लाख वृक्ष बीस साल, दस लाख वृक्ष दस साल के और पंद्रह लाख पौधे पांच साल के हैं। इसके अलावा हर साल पांच लाख पौधे लगाए जाते हैं। वन विभाग के आंकड़ाें के मुताबिक सफेदे की उम्र बीस साल, शीशम की उम्र साठ साल और किकर की उम्र 48 साल की होती है।
उसके बाद इन पेड़ों को बूढ़ों की श्रेणी में डाल दिया जाता है। इस तरह के पेड़ों से कोई अनहोनी घटना न हो, इसके लिए इनको कटवा दिया जाता है। क्योंकि ये पेड़ कमजोर होकर तेज हवा के झोंके पर गिर भी सकते हैं। इसके अलावा कमजोर पेड़ों की चोरी होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
इन स्थानों से काटे जाएंगे पेड़
गांव बजीदा डिस्ट्रीब्यूटर जीटी रोड 124 से 132 किलोमीटर के बीच, खांडा खेड़ी, हांसी ब्रांच, नरदक मिडस्ट्रीब्यूटर, कुरलन माइनर, बड़ा गांव सहित अन्य जगहों से पेड़ काटे जाएंगे। आमजन को चाहिए कि जहां पर पेड़ गिरने को हो रहे हैं, विभाग को सूचना दें। उन पेड़ों को भी कटवा दिया जाएगा। सरकारी पेड़ को काटना कानूनी जुर्म है।
विकास के नाम पर चढ़ रही बली
राष्ट्रीय राजमार्ग को सिक्स लेन बनाने के नाम पर जिले में 79 हजार 16 पेड़-पौधे काटे गए। इसकी एवज में मात्र 45 हजार पौधे लगाए गए, जबकि पेड़ काटने से पर्यावरण को दूषित होने से रोकने के लिए एक पेड़ की एवज में दस पौधे लगाए जाने चाहिए, वहीं कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज निर्माण में सैकड़ों पौधों को काटा गया और अब एनडीआई रोड को चौड़ा करने के लिए करीब 1500 हरे भरे वृक्ष काटे जा रहे हैं।
पर्यावरण को ठीक रखने के लिए प्रदेश में भू-भाग का 20 प्रतिशत क्षेत्र होना चाहिए, ताकि पर्यावरण को शुद्ध रखा जा सके, लेकिन वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में केवल 3.5 प्रतिशत ही वन भूमि है।