चंडीगढ़। सेक्टर-36 ए स्थित एमसीएम कॉलेज फॉर वुमन की गीतांजलि हेल्पलाइन कमेटी ने ‘साइकोसोशल एंड लीगल पर्सपेक्टिव्स ऑफ चाइल्ड एब्यूज’ विषय पर एक पैनल डिस्कशन का आयोजन किया। पैनल चर्चा का मुख्य उद्देश्य घरेलू यौन शोषण एवं इसकी रोकथाम के बारे में प्रतिभागियों को जागरूक करना था। इस आयोजन में 183 छात्राओं ने भाग लिया।
इस पैनल डिस्कशन में कंसल्टेंट मनोचिकित्सक डॉ. सिम्मी वड़ैच, एंड इंसेस्ट ट्रस्ट के निदेशक (प्रोजेक्ट्स एंड रिसर्च) सुप्रीत धीमान, वकील मधु पी. सिंह बतौर विशेषज्ञ उपस्थित थे। अपने संबोधन में डॉ. वड़ैच ने सामान्य रूप से मानसिक स्वास्थ्य अवस्थाओं व मनोचिकित्स्कीय रणनीतियों से जुड़ी शारीरिक, संज्ञानात्मक और व्यवहारात्मक लक्षणों पर चर्चा करते हुए इस तरह के मनोरोगियों की देखभाल करने की युक्तियों के बारे में जानकारी दी। वकील मधु पी. सिंह ने कहा कि इन यौन शोषण पीड़ितों के घरों में ही इन्हे मुंह बंद रख चुपचाप सहने को विवश किया जाता है, ताकि समाज में उनकी इज्जत बनी रहे। यही कारण है कि न यह मसला खुलकर बाहर आ सका और न ही इस पर कोई फैसला लिया जा सका है। उन्होंने पॉक्सो जैसी विधिसंगत प्रावधानों का भी उल्लेख किया।