चंडीगढ़। मेयर चुनाव में एक बार फिर भाजपा को बगावत का डर सता रहा है। यही वजह है कि पार्टी ने अब तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। पिछले साल की तरह इस बार भी नामांकन से कुछ देर पहले ही उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की जाएगी। हालांकि रविवार दोपहर प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम के चंडीगढ़ पहुंचते ही भाजपा पार्षद अलग-अलग गुटों में उनसे मिलने पहुंचे। इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद और प्रदेश प्रभारी पूरे दिन साथ रहे। मेयर प्रत्याशी के लिए प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद के अलावा पार्षद शक्ति प्रकाश देवशाली, महेश इंदर सिंह और रविकांत शर्मा दौड़ में हैं।
मेयर चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भाजपा में रविवार को अलग-अलग गुटों के साथ बैठकें होती रहीं। हर गुट प्रदेश प्रभारी के सामने अपनी बात रखने पहुंचा। भाजपा बगावत को रोकने के लिए पिछले साल की योजना पर काम कर रही है। नामांकन से कुछ देर पहले नामों की घोषणा कर तत्काल फार्म भरवाया जाएगा ताकि बगावत को रोका जा सके। दुष्यंत गौतम की पूरी कोशिश है कि मेयर उम्मीदवार पर एक राय बने ताकि चुनावी साल में पार्टी की फिजा खराब न हो
नहीं बन पा रहा एक मत
मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर पद के लिए अभी भी पार्षदों के गुट बंटे हैं। संगठन को कोई भी ऐसा नाम नहीं मिल पा रहा है जिस पर सभी एक मत हों। इससे पहले भी प्रदेश प्रभारी ने पार्टी के वरिष्ठ लोगों से 6-6 लोगों के नाम मांगे रहे, जिसमें उम्मीद थी कि कुछ नाम समान होंगे। इसमें भी पेच फंस गया है।
एक व्यक्ति-एक जिम्मेदारी का फार्मूला भी आ रहा आड़े
कुछ पार्षदों ने कहा कि पार्टी में एक व्यक्ति-एक जिम्मेदारी का फार्मूला है। ऐसे में चंडीगढ़ में इस फार्मूले को लागू करना चाहिए। सूत्रों के अनुसार पार्षदों ने इस संबंध में रविवार को भी दुष्यंत गौतम से बात की थी। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि एक व्यक्ति बार-बार महत्वपूर्ण पद के लिए कैसे ताल ठोक सकता है। ऐसे में अन्य कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटता है।
आज शाम छह बजे तक कर सकते हैं नामांकन
मेयर चुनाव के लिए सोमवार को आखिरी दिन है। नामांकन करने के लिए उम्मीदवार शाम छह बजे तक पहुंचकर नामांकन कर सकते हैं। उसके बाद पांच दिसंबर को आवेदन पत्रों की जांच की जाएगी। 8 जनवरी को मतदान से पहले तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकता है।
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भाजपा में मेयर पद के दावेदार
अरुण सूद
वर्तमान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद मेयर पद के प्रबल दावेदार हैं। अरुण सूद का जन्म वर्ष 1971 में पंजाब के मोगा जिले में हुआ। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से छात्र राजनीति में अरुण सूद ने प्रवेश किया। वर्ष 2003-04 में सूद भाजपा के सेक्रेटरी बनाए गए। उसके बाद उन्हें जनरल सेक्रेटरी की जिम्मेदारी सौंपी गई। वर्ष 2011 में पार्षद का टिकट दिया। उसके बाद वर्ष 2016 में अरुण सूद भाजपा की ओर से मेयर भी रहे। पेशे से वकील अरुण सूद को पिछले वर्ष भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी है।
शक्ति प्रकाश देवशाली
वर्ष 1992 में राम मंदिर आंदोलन से अपना राजनीतिक जीवन शुरू करने वाले शक्ति प्रकाश देवशाली 1993 में भाजपा से जुड़े। मूल रूप से उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग निवासी शक्ति प्रकाश देवशाली को वर्ष 1994 में मंडल के सेक्रेटरी बनाया। उसके बाद 1996 में युवा मोर्चा के प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य बने। उसके बाद 1998 में प्रदेश महासचिव, 2003 में विश्व हिंदू परिषद मीडिया प्रभारी, उसके बाद मीडिया प्रभारी, जिला अध्यक्ष और जिला संयोजक की जिम्मेदारी मिली। शक्ति प्रकाश देवशाली को भाजपा ने 2016 में पार्षद का टिकट दिया, जिसमें उन्हें जीत मिली।
महेश इंदर सिंह
पंजाब विश्वविद्यालय से अपनी छात्र राजनीति शुरू करने वाले महेश इंदर सिंह 2006-07 में युवा मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी में रहे। उसके बाद प्रदेश महासचिव, महामंत्री रहते हुए प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। 2013 में अनुराग ठाकुर के साथ युवा मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी शामिल रहे। युवा शक्ति को बल देने का भरोसा देने पर संगठन ने 2016 में पार्षद की जिम्मेदारी सौंपी।
रविकांत शर्मा
मूलरूप से हिमाचल के ऊना के निवासी 1984 में ऊना कॉलेज में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े। 1996 में चंडीगढ़ भाजपा से जुड़े। संजय टंडन के करीबी होने के कारण 2006 से 2009 तक मंडल अध्यक्ष, 2012 में महामंत्री और उसके बाद 6 साल जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। इस बीच 2016 मे पार्षद का चुनाव भी जीता।